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New Delhi / Patna : दिल्ली की उमस भरी गर्मी के बीच प्रगति मैदान का भारत मंडपम इन दिनों देश-दुनिया के रंग-बिरंगे धागों और कपड़ों से सराबोर है। मौका है ‘भारत टेक्स 2026’ का, जहां देश के कपड़ा उद्योग की ताकत दिखाई जा रही है। लेकिन इस पूरे मेले में अगर कोई एक कोना सबसे ज्यादा लोगों को अपनी तरफ खींच रहा है, तो वह है बिहार सरकार के उद्योग विभाग का पैवेलियन। मेले के तीसरे दिन भी यहाँ पैर रखने की जगह नहीं थी। क्या आम लोग, क्या बड़े कारोबारी और क्या सरकारी अफसर… हर कोई यह देखने को बेताब दिखा कि आखिर बिहार के धागों में ऐसा क्या जादू है, जो आज देश-विदेश के बाजार में धूम मचा रहा है।
जब आंध्र प्रदेश की मंत्री ने पूछा- ये खूबसूरत सिल्क बिहार का है?
तीसरे दिन बिहार पैवेलियन का माहौल और भी खुशनुमा हो गया जब यहाँ कई जाने-माने मेहमान पहुंचे। आंध्र प्रदेश सरकार की हथकरघा और वस्त्र मंत्री एस साविता जब यहां आईं, तो वे बिहार के सिल्क और सूती कपड़ों की कारीगरी देखकर हैरान रह गईं। उन्होंने वहां मौजूद कारीगरों से उनकी कला के बारे में खुलकर बात की।
उनके साथ ITPO यानी इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन के मुखिया जावेद अशरफ, महाराष्ट्र से आए रेशम विभाग के उप निदेशक डॉ. महेंद्र बी. धावले और बिहार व्यापारी आयोग के सदस्य रोहित चंद्र भी पहुंचे। इन मेहमानों को खुद बिहार के उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता, हथकरघा निदेशक डॉ. विद्या नंद सिंह और एमएसएमई निदेशक अमन समीर ने पूरे पैवेलियन का चक्कर लगवाया। मेहमानों ने न केवल बिहार के पारंपरिक कपड़ों की तारीफ की, बल्कि यह भी माना कि बिहार अब कपड़ा उद्योग के मामले में देश का एक नया केंद्र बनकर उभर रहा है।

भागलपुरी सिल्क से लेकर आधुनिक रेडीमेड गारमेंट्स तक का सफर
इस पैवेलियन में कदम रखते ही आपको बिहार की मिट्टी की खुशबू और वहां के बुनकरों के हुनर का अहसास होने लगता है। एक तरफ जहां बिहार की पहचान माने जाने वाले जीआई-टैग वाले मशहूर भागलपुरी सिल्क और बावनबूटी जैसी पारंपरिक कलाओं को खूबसूरती से सजाया गया है, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक दौर की बड़ी गारमेंट फैक्ट्रियों की झलक भी दिखाई दे रही है।
पैवेलियन में आए कई बड़े कपड़ा व्यापारियों ने माना कि बिहार में अब वह माहौल बन चुका है जहां कोई भी बेझिझक अपनी फैक्ट्री लगा सकता है। बिहार की सबसे बड़ी ताकत है वहां के मेहनती और हुनरमंद लोग, जो पहले काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते थे, लेकिन अब वे अपने ही घर में रहकर कमाल के कपड़े तैयार कर रहे हैं। बिहार सरकार की नई और आसान नीतियां भी इन व्यापारियों को अपनी ओर खींच रही हैं।

उम्मीदों का नया ताना-बाना
तीसरे दिन की यह भारी भीड़ इस बात की गवाह है कि बिहार अब सिर्फ पुरानी कहानियों का प्रदेश नहीं रह गया है। यह वह नया बिहार है जो उद्योग की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा रहा है। पैवेलियन में आने वाले कई निवेशकों ने बिहार में पैसा लगाने और नए कारखाने खोलने की इच्छा जताई है। यह इस बात का साफ इशारा है कि आने वाले दिनों में बिहार के लाखों युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के नए मौके मिलने वाले हैं।

अगर आप दिल्ली में हैं, तो यह मौका हाथ से न जाने दें
अगर आप भी इस खूबसूरत और बदलते बिहार की तस्वीर को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं, तो आपके पास कल तक का मौका है। बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने सभी लोगों और कपड़ा प्रेमियों से अपील की है कि वे 17 जुलाई 2026 तक प्रगति मैदान के भारत मंडपम में हॉल नंबर 11 के स्टॉल नंबर A4 पर जरूर आएं। यहाँ आकर आप न सिर्फ बिहार की समृद्ध विरासत को देख पाएंगे, बल्कि यह भी समझ पाएंगे कि कैसे बिहार की नई पीढ़ी आज उद्योग के क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रही है।

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