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Patna : सरकारी अस्पतालों में अगर डॉक्टर ड्यूटी छोड़कर गायब रहते हैं, मरीजों को निजी अस्पतालों का रास्ता दिखाते हैं या सरकारी समय में अपनी क्लीनिक चलाते हैं, तो अब बचना मुश्किल होगा। बिहार सरकार ने ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही और मनमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के सचिव यानी हेल्थ सेक्रेटरी (HS) कुमार रवि ने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अरवल, भोजपुर, लखीसराय और सहरसा जिले के सरकारी अस्पतालों की समीक्षा की। बैठक में अस्पतालों की व्यवस्था, डॉक्टरों की मौजूदगी, इमरजेंसी सेवाएं, सर्जरी, भव्या (BHAVYA) पोर्टल और मरीजों की रेफरल व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।
अब ड्यूटी छोड़कर गायब हुए तो सीधे होगी कार्रवाई
बैठक के दौरान हेल्थ सेक्रेटरी (HS) का सबसे सख्त संदेश डॉक्टरों की ड्यूटी को लेकर था। उन्होंने सभी सिविल सर्जनों से कहा कि रोस्टर ड्यूटी का पालन किसी भी कीमत पर सुनिश्चित कराया जाए। अगर कोई डॉक्टर बिना स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से अनुपस्थित मिलता है तो उसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अब यह नहीं चलेगा कि डॉक्टर का नाम रोस्टर में हो और मरीज अस्पताल में उसका इंतजार करते रहें।
मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की शिकायत मिली तो नहीं मिलेगी राहत
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि कई बार शिकायत आती है कि सरकारी अस्पताल में इलाज की सुविधा होने के बावजूद मरीजों को निजी अस्पताल भेज दिया जाता है। अगर जांच में किसी डॉक्टर की इसमें भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों पर नजर रखें और दोषी मिलने पर बिना देरी कार्रवाई करें, ताकि सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा बना रहे।
सरकारी ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस पर भी रोक
कुमार रवि ने यह भी साफ कर दिया कि सरकारी अस्पताल की ड्यूटी छोड़कर निजी क्लीनिक चलाना या मरीज देखना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर जांच में कोई डॉक्टर सरकारी ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है। सरकार चाहती है कि डॉक्टर जिस समय सरकारी अस्पताल में तैनात हैं, उस दौरान पूरी जिम्मेदारी के साथ मरीजों की सेवा करें।
अच्छा काम करने वालों को भी मिलेगा सम्मान
बैठक में सिर्फ कार्रवाई की बात नहीं हुई। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि जो डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी ईमानदारी से बेहतर काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित और प्रोत्साहित भी किया जाएगा। इससे दूसरे कर्मचारियों का भी मनोबल बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा।
समीक्षा के दौरान जिला अस्पतालों की 24×7 इमरजेंसी सेवाओं की भी जांच की गई। जिन जिलों में व्यवस्था अच्छी मिली, वहां संतोष जताया गया। वहीं जहां कमियां मिलीं, वहां सेवाओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मरीज अस्पताल पहुंचे तो उसे हर समय इलाज मिले। इसके लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयों और जरूरी सुविधाओं पर लगातार नजर रखी जाए।
भोजपुर मॉडल की हुई तारीफ, दूसरे जिलों को भी सीख लेने की सलाह
समीक्षा के दौरान भोजपुर सदर अस्पताल की व्यवस्था सबसे बेहतर पाई गई। यहां सिविल सर्जन खुद ड्यूटी रोस्टर की नियमित निगरानी कर रहे हैं और डॉक्टर समय पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस व्यवस्था की तारीफ करते हुए स्वास्थ्य सचिव ने दूसरे जिलों के अधिकारियों से भी कहा कि वे भोजपुर की कार्यप्रणाली से सीख लें। साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से ज्यादा से ज्यादा सर्जरी कराने और इमरजेंसी सेवाओं को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
सरकार का साफ संदेश
इस समीक्षा बैठक के जरिए स्वास्थ्य विभाग ने साफ संकेत दे दिया है कि सरकारी अस्पतालों में अब लापरवाही, मनमानी और मरीजों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो डॉक्टर ईमानदारी से काम करेंगे, उन्हें सम्मान मिलेगा और जो नियम तोड़ेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार की कोशिश है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले हर मरीज को समय पर बेहतर इलाज मिले और लोगों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर और मजबूत हो।
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