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Ranchi : हर साल की तरह इस बार भी जगन्नाथपुर की रथयात्रा में हजारों श्रद्धालु उमड़े थे। कोई भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आया था, तो कोई रथ की रस्सी खींचने की इच्छा लेकर। चारों तरफ “जय जगन्नाथ” के जयघोष गूंज रहे थे। लेकिन इस बार रथयात्रा सिर्फ आस्था का पर्व बनकर नहीं रही। सीएम हेमंत सोरेन ने इसी मंच से एक ऐसा ऐलान किया, जिसने श्रद्धालुओं के बीच नई उम्मीद जगा दी।
सीएम ने कहा कि अब जगन्नाथपुर मंदिर को सिर्फ एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं देखा जाएगा। राज्य सरकार इसे ऐसी पहचान दिलाना चाहती है कि दूर-दूर से आने वाले लोग भी इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को महसूस कर सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने मंदिर तक जाने वाली सड़क पर भव्य तोरणद्वार बनाने की घोषणा की।

रथ की रस्सी थामी, फिर लोगों के दिल की बात कही
सीएम हेमंत सोरेन जब भगवान जगन्नाथ के रथ तक पहुंचे तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो चुका था। पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद उन्होंने रथ की रस्सी थामी और यात्रा की शुरुआत की। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, हजारों श्रद्धालु भी उसके पीछे चल पड़े। “जय-जय जगन्नाथ” के नारों से पूरा जगन्नाथपुर गूंज उठा।
रथयात्रा शुरू होने के बाद मुख्यमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। इस परंपरा को और मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी भी है।

“दूर से ही दिखेगा जगन्नाथपुर मंदिर”
सीएम ने कहा कि कई बार बाहर से आने वाले लोगों को मंदिर की भव्यता का अंदाजा तब तक नहीं होता, जब तक वे उसके बिल्कुल पास नहीं पहुंच जाते। अब सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी कि मंदिर की पहचान दूर से ही हो जाए।
उन्होंने घोषणा की कि धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग पर भव्य तोरणद्वार बनाया जाएगा। यह सिर्फ एक प्रवेश द्वार नहीं होगा, बल्कि झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनेगा।
सीएम ने कहा कि मंदिर की सुंदरता और आसपास के पूरे क्षेत्र को भी बेहतर तरीके से विकसित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिले।

सिर्फ मेला नहीं, लोगों की भावनाओं का उत्सव है रथयात्रा
अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि जगन्नाथपुर रथयात्रा का इंतजार लोग पूरे साल करते हैं। जिस तरह आज हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं, वह बताता है कि भगवान जगन्नाथ के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश होगी कि आने वाले वर्षों में रथयात्रा मेला और अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और भव्य बने। श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाए।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना
इससे पहले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और सीएम हेमंत सोरेन ने भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की। दोनों ने झारखंड की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी प्रदेशवासियों को रथयात्रा की शुभकामनाएं दीं।

भक्ति, परंपरा और विकास का मिला संदेश
इस बार की रथयात्रा में सिर्फ धार्मिक उल्लास ही नहीं दिखा, बल्कि भविष्य की एक नई तस्वीर भी सामने आई। एक ओर हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आस्था में डूबे रहे, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री की घोषणा ने यह संकेत दिया कि सरकार जगन्नाथपुर मंदिर को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

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