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Chatra : चोरी करने का तरीका भी अब बदल गया है। पहले चोर मौका देखकर वारदात को अंजाम देते थे, लेकिन चतरा में 60 लाख रुपये के जेवरात चोरी के मामले में पुलिस ने जिस गिरोह का खुलासा किया है, उसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। इस गिरोह के सदस्य पहले कई दिनों तक अपने टारगेट की रेकी करते थे। फिर ग्राहक बनकर नजदीकी बढ़ाते थे। इसके बाद मौका मिलते ही बाइक या कार की डिक्की से लाखों का सामान गायब कर देते थे।
इतना ही नहीं, गिरोह के सदस्यों को इस काम की बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जाती थी। चतरा एसपी अनिमेश नैथानी के मुताबिक, हैदराबाद में उन्हें बाइक और कार की डिक्की बिना नुकसान पहुंचाए खोलने, भीड़ में अपनी पहचान छिपाने, रेकी करने और वारदात के बाद तेजी से फरार होने की तकनीक सिखाई जाती थी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन युवकों को अलग-अलग राज्यों में भेज दिया जाता था।
इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह का सरगना अपने सदस्यों को अपराध के बदले हर महीने एक लाख रुपये तक की सैलरी देता था।
पहले ग्राहक बनकर पहुंचा, फिर बना भरोसेमंद
चतरा पुलिस ने इस मामले में ओडिशा के जाखापुर थाना क्षेत्र के दशमनिया गांव निवासी दीपक प्रधान को गिरफ्तार किया है। एसपी के अनुसार, दीपक कुख्यात गुलगुलिया गिरोह का सक्रिय सदस्य है। इटखोरी बाजार में ज्वेलरी कारोबारी दिलीप सोनी की बाइक की डिक्की से 12 जुलाई को करीब 60 लाख रुपये के जेवरात चोरी हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो धीरे-धीरे इस वारदात की पूरी कहानी सामने आने लगी। एसपी अनिमेश नैथानी ने मीडिया को बताया कि दीपक प्रधान सीधे चोरी करने नहीं पहुंचा था। उसने पहले कारोबारी की दुकान और उसकी दिनचर्या को समझा। इसके लिए वह ग्राहक बनकर दुकान पर पहुंचा। उसने कारोबारी को आधा किलो चोरी का सोना सस्ते दाम पर बेचने का प्रस्ताव दिया। ऊपर से देखने पर यह सोने की खरीद-फरोख्त का मामला लग रहा था, लेकिन पुलिस के अनुसार इसके पीछे असली मकसद कुछ और था। दीपक इसी बहाने कारोबारी के करीब पहुंचा और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने लगा।
कब निकलता है, जेवर कहां रखता है, सब पता किया
आरोपी ने कई दिनों तक कारोबारी की रेकी की। वह यह देखता रहा कि कारोबारी दुकान से कब निकलता है, जेवरात किस तरह ले जाता है और बाइक कहां खड़ी करता है। धीरे-धीरे उसने कारोबारी की पूरी दिनचर्या समझ ली। पुलिस के अनुसार, जब गिरोह को लगा कि वारदात के लिए सही मौका है, तब बाइक की डिक्की को निशाना बनाया गया और उसमें रखे लाखों रुपये के जेवरात चोरी कर लिए गए। यानी वारदात से पहले चोरों ने कोई जल्दबाजी नहीं की। पहले भरोसा जीता, फिर जानकारी जुटाई और आखिर में मौका देखकर हाथ साफ कर दिया।
गिरोह में शामिल युवकों को मिलती थी एक लाख रुपये तक की सैलरी
चतरा एसपी अनिमेष नैथानी ने बताया कि इस संगठित गिरोह का सरगना ओडिशा का आकाश प्रधान है। उसके गिरोह में ओडिशा के दशमनिया और आसपास के गांवों के दर्जनों युवक शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में जाकर चोरी और छिनतई की घटनाओं को अंजाम देते थे। इसके बदले उन्हें हर महीने एक लाख रुपये तक दिए जाते थे। युवाओं को पहले गिरोह में शामिल किया जाता था। इसके बाद उन्हें अपराध करने के तरीके सिखाए जाते थे। ट्रेनिंग के बाद उन्हें अलग-अलग इलाकों में भेजकर टारगेट चुनने और वारदात करने की जिम्मेदारी दी जाती थी।
हैदराबाद में मिलती थी खास ट्रेनिंग
एसपी ने बताया कि गिरोह के सदस्यों को हैदराबाद में विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें बाइक और कार की डिक्की बिना तोड़े या नुकसान पहुंचाए खोलने की तकनीक सिखाई जाती थी। इसके अलावा भीड़ में पहचान छिपाकर चलना, किसी व्यक्ति या कारोबारी की कई दिनों तक रेकी करना और वारदात के बाद तेजी से मौके से निकल जाना भी सिखाया जाता था। यही वजह है कि गिरोह के सदस्य वारदात से पहले काफी सावधानी बरतते थे। वे सीधे किसी दुकान या कारोबारी को निशाना नहीं बनाते थे। पहले उसकी गतिविधियों को समझते थे और फिर मौका देखकर चोरी या छिनतई करते थे।
चतरा में पहले भी कर चुके हैं वारदात
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार दीपक प्रधान का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। वह पहले भी चोरी, छिनतई और वाहनों की डिक्की से सामान उड़ाने की घटनाओं में शामिल रहा है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि उसने चतरा जिले के पत्थलगड़ा और जोरी थाना क्षेत्र में भी ज्वेलरी कारोबारियों को निशाना बनाया था। पुलिस अब उसके पुराने मामलों की भी जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी हैं कि दीपक प्रधान और उसके गिरोह ने चतरा के अलावा दूसरे राज्यों में कितनी वारदातों को अंजाम दिया है।
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