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Bokaro : बोकारो की जोशी कॉलोनी हर दिन की तरह उस शाम भी शांत थी। लोग अपने घर लौट रहे थे, बच्चे खेलते-खेलते थक कर घरों में सिमट रहे थे और मोहल्ले की हवा में चाय की हल्की खुशबू तैर रही थी। इसी खुशबू के बीच एक बुजुर्ग दंपती रोज की तरह अपनी दुकान समेट रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि उसी रात यह गली अपनी सबसे दर्दनाक सुबह देखने वाली है।
मुस्कान और मेहनत रोक लेती थी लोगों को
महावीर साव और उनकी पत्नी कौश्यला देवी इस कॉलोनी में वर्षों से चाय और पकौड़ी की दुकान चलाते थे। उम्र भले बढ़ रही थी, लेकिन उनकी मुस्कान और मेहनत अभी भी लोगों को रोक लेती थी। इलाके के बच्चे उन्हें दादा-दादी कहकर बुलाते थे और कई लोग उनकी दुकान की चाय को अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते थे। उनके छोटे से घर और बाजार के बीच एक सादा सा सपना था… मेहनत से गुजारा करना और बिना किसी परेशानी के बाकी का जीवन जी लेना।
ठीक सामने से शुरू हुई रंजिश
ठीक सामने ओमप्रकाश की भी चाय-नाश्ते की दुकान थी। शहरों में छोटे व्यापारियों के बीच ग्राहकों को लेकर हल्के विवाद आम बात है, लेकिन यह विवाद धीरे-धीरे मन में बैठ गया। ओमप्रकाश को लगता था कि दंपती उसकी दुकान के ग्राहक खींच लेते हैं। दो-चार शब्दों की बहस, कुछ तानों भरी नजरें और लंबा होता मनमुटाव धीरे-धीरे रंजिश में बदल गया।
वारदात वाली रात नशे ने ली दो ज़िंदगियां
एक दिसंबर की रात दंपती घर लौट चुके थे। चूल्हा जलाने की तैयारी चल रही थी। तभी दो परछाइयां उनके आंगन के पास रुकीं। यह ओमप्रकाश और उसका साथी रामचन्द्र था, दोनों शराब के नशे में। गुस्से और नशे ने मिलकर उन्हें उस हद तक धकेल दिया जहां इंसान अपनी सोच खो देता है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों ने ईंट से वार किया और फिर चाकू से हमला किया। कुछ ही मिनटों में दंपती अपने ही घर में खून से सने पड़े थे।
सुबह मोहल्ले में पसरा सन्नाटा
अगली सुबह जब लोगों ने दरवाजा खटखटाया और जवाब नहीं मिला, तब किसी को शक हुआ। घर का नजारा देखकर गली में सन्नाटा छा गया। जिन हाथों से रोज पकौड़ी की खुशबू उठती थी, वे अब हमेशा के लिए थम चुके थे। कई लोगों की आंखें नम थीं।
पुलिस ने दो संदेही गुनहगारों को दबोचा
एसपी हरविंदर सिंह ने मामले का खुलासा करने और हत्यारों को दबोचने के वास्ते डीएसपी आलोक रंजन की देखरेख में एसआईटी गठित की। गठित टीम ने तेजी से जांच शुरू की। खून लगा चाकू, ईंट, वारदात के समय पहने कपड़े और दंपती का टूटा की-पैड फोन बरामद हुआ। सबूत साफ बता गया कि अपराध कितना अचानक और कितना क्रूर था। पुलिस ने दोनों संदेही गुनहगारों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होंने कहा कि बुजुर्ग दंपती की चाय-पकौड़े की दुकान उसकी दुकान से ज्यादा चलती थी। अधिकतर ग्राहक उसकी ही दुकान पर जाते थे। धंधे में कंपटीशन चल रहा था, इस चलते दोनों को मौत के घाट उतार दिया।
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