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Ranchi (Pawan Thakur) : रांची डीसी का जनता दरबार मंगलवार को हमेशा की तरह लोगों की भीड़ से भरा था। कोई जमीन विवाद लेकर आया था, कोई मुआवजे की उम्मीद में बैठा था, तो कोई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुका था। हर चेहरे पर अपनी-अपनी परेशानी थी। लेकिन इसी भीड़ में एक चेहरा ऐसा भी था, जिसकी कहानी ने पूरे जनता दरबार का माहौल बदल दिया। यह चेहरा था रांची के शाहनवाज आलम का। शाहनवाज अपने पैरों पर चलकर नहीं आए थे। वह हाथों के सहारे जनता दरबार तक पहुंचे थे। हर कदम नहीं, हर खिंचाव उनके संघर्ष की कहानी कह रहा था। उनके लिए जनता दरबार तक पहुंचना भी किसी जंग से कम नहीं था। लेकिन शायद उन्हें उम्मीद थी कि इस बार कोई उनकी बात सुनेगा। और हुआ भी कुछ ऐसा ही।
चंद मिनटों में बदली एक जिंदगी की रफ्तार
जब शाहनवाज की बारी आई तो उन्होंने अपनी परेशानी डीसी मंजूनाथ भजंत्री के सामने रखी। बताया कि चलने-फिरने में कितनी मुश्किल होती है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतें भी उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। फरियाद सुनते ही डीसी मंजूनाथ भजंत्री का कलेजा दरक गया। उन्होंने दस्तावेजों की तुरंत जांच कराई। फिर कुछ ही देर में शाहनवाज को इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल उपलब्ध करा दी। सबसे भावुक पल तब आया, जब डीसी खुद शाहनवाज को ट्राईसाइकिल तक लेकर गए। सिर्फ सरकारी आदेश देकर आगे बढ़ जाने के बजाय उन्होंने यह पक्का किया कि मदद सच में जरूरतमंद तक पहुंचे। कुछ देर पहले जो युवक हाथों के सहारे अंदर आया था, वही अब इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल पर मुस्कुराते हुए बाहर निकल रहा था। बाहर निकलते वक्त शाहनवाज के मुख से हौले से बस यही निकला, “डीसी हों तो ऐसे, भला हो साहेब का”।
रांची डीसी के जनता दरबार से आई दिल छू लेने वाली तस्वीर
हाथों के बल दिव्यांग शाहनवाज आलम मदद की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, DC मंजूनाथ भजंत्री ने तुरंत इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई। #RanchiNews #JharkhandNews #TodayNews #NewsSamvad pic.twitter.com/mtBSWKBOXj— News Samvad (@newssamvaad) May 12, 2026
जनता दरबार में सिर्फ एक कहानी नहीं, सैकड़ों उम्मीदें पहुंचीं
जनता दरबार में सिर्फ शाहनवाज ही नहीं थे। वहां दूर-दराज गांवों से आए सैकड़ों लोग अपनी परेशानियां लेकर पहुंचे थे। किसी का जमीन का मामला वर्षों से अटका था, कोई मुआवजे के इंतजार में था, तो कोई सरकारी भुगतान नहीं मिलने से परेशान था। डीसी मजूनाथ भजंत्री ने सुदूर इलाकों से आए लोगों को प्राथमिकता दी। देर शाम तक एक-एक शिकायत सुनी गई। संबंधित अधिकारियों को मौके पर निर्देश दिए गए। यह वही तस्वीर थी, जो आमतौर पर लोग प्रशासन से देखना चाहते हैं, जहां फाइलों से ज्यादा इंसानों की बात सुनी जाए।
आंगनबाड़ी सेविकाओं का दर्द भी पहुंचा जनता दरबार तक
जनता दरबार में आंगनबाड़ी सेविकाओं का एक समूह भी पहुंचा। उनकी शिकायत थी कि मानदेय समय पर नहीं मिलता। पोषाहार राशि में भी अनियमितता है। उनका कहना था कि आर्थिक तंगी के बीच काम करना मुश्किल होता जा रहा है। उपायुक्त ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को तत्काल जांच के निर्देश दिए। साफ शब्दों में कहा गया कि लाभुकों और सेविकाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
जमीन के मामलों में सख्त रुख
जनता दरबार में सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन से जुड़े मामलों की रहीं। अनगड़ा के सेवाराम महतो ने बताया कि परिवार की जमीन के दाखिल-खारिज में गड़बड़ी हुई है। दोनों भाइयों के नाम होना चाहिए था, लेकिन प्रक्रिया सिर्फ एक नाम पर आगे बढ़ी। दस्तावेज देखने के बाद उपायुक्त ने इसे गंभीर लापरवाही माना। अनगड़ा अंचल अधिकारी को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया गया। साथ ही संबंधित तत्कालीन कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र गठित करने का आदेश दिया गया। सोनाहातू से आए एक आवेदक ने प्लॉट सुधार में देरी की शिकायत की। इस पर संबंधित अंचल अधिकारी को फटकार लगाई गई और एक महीने में सभी लंबित मामलों के निपटारे का निर्देश दिया गया।
कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जे की शिकायत
मांडर से आए एक व्यक्ति ने शिकायत की कि महुआजाड़ी मौजा के कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। शिकायत में एक पुलिसकर्मी का नाम भी सामने आया। उपायुक्त ने तुरंत जांच के आदेश दिए और साफ कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।
मुआवजे का इंतजार कर रहे लोगों को राहत की उम्मीद
भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आईं। लोगों ने बताया कि लंबे समय से भुगतान नहीं होने से परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। इस पर अधिकारियों को NHAI के साथ समन्वय बनाकर जल्द भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की डोर
जनता दरबार के अंत में डीसी मंजूनाथ भजंतेरी ने कहा कि प्रशासन और जनता के बीच कोई दूरी नहीं होनी चाहिए। छोटी समस्याओं का समाधान प्रखंड और अंचल स्तर पर ही होना चाहिए, ताकि लोगों को जिला मुख्यालय तक आने की नौबत न आए।
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