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Patna : नियोजन भवन पटना में बुधवार को दूरसंचार विभाग, भारत सरकार की ओर से साइबर क्राइम/फ्रॉड नागरिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार दूरसंचार मंत्रालय के महाप्रबंधक राजीव रंजन, श्रम संसाधन विभाग के विशेष सचिव आलोक कुमार और कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक देश में करीब 33 हजार करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कई AI आधारित टूल्स विकसित किए गए हैं।
साइबर फ्रॉड रोकने के लिए नए AI टूल्स
- ASTR (AI and Facial Recognition Solution): इससे फर्जी पहचान और चेहरों के जरिए लिए गए हजारों सिम कनेक्शन पकड़े गए हैं। अब तक करोड़ों फर्जी कनेक्शन बंद कराए जा चुके हैं।
- Digital Intelligence Portal (DIP): साइबर अपराधियों की जानकारी इकट्ठा कर सुरक्षा एजेंसियों और बैंकों से साझा की जाती है, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
- संचार साथी पोर्टल और मोबाइल एप: इसके जरिए उपभोक्ता साइबर फ्रॉड कॉल, एसएमएस और व्हाट्सएप नंबर ब्लॉक कर सकते हैं। चोरी या खोए मोबाइल को ट्रैक करना और अपने नाम से जारी सभी कनेक्शन देखना भी संभव है।
- FRI (Financial Fraud Risk Indicator): यह टूल संदिग्ध मोबाइल नंबरों से जुड़े UPI और बैंक खातों पर पैसे भेजने से पहले अलर्ट देता है और जरूरत पड़ने पर लेन-देन रोक देता है।
बिहार पुलिस और संस्थान भी जुड़े
अपर महानिदेशक बाबू राम ने बताया कि दूरसंचार विभाग ने बिहार पुलिस, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स जैसी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा उपायों से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं और AI टूल्स के इस्तेमाल से साइबर फ्रॉड पर काबू पाया जा रहा है।

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