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Lucknow (Pawan Kumar) : लखनऊ की राजनीतिक हवा रविवार को अचानक बदल गई। समाजवादी पार्टी के पुराने नेता दारासिंह यादव जब अपने बेबाक और अलग अंदाज में सड़क पर उतरे, तो पूरे माहौल में चर्चा शुरू हो गई। जिस तरह उन्होंने खुलकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, वह कई नेताओं के लिए हैरानी की वजह बनी।
निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया बनी नई चुनौती
प्रदेश में समाजवादी पार्टी पिछले चार सालों से हर मुद्दे पर भाजपा को घेरती रही है। लेकिन अब निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया ने पार्टी के लिए नई मुश्किल पैदा कर दी है। पार्टी अध्यक्ष की ओर से कड़ा आदेश जारी हुआ, लेकिन यह आदेश प्रदेश और जिला स्तर तक सही तरीके से पहुंच नहीं पाया। कई नेता इसकी गंभीरता से अनजान रहे।
सोशल मीडिया पर अचानक दिखी फोटो की बरसात
जैसे ही आदेश की खबर फैली, पार्टी के कई नेताओं को अपनी जिम्मेदारी याद आ गई। नंबर कटने के डर से सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष अचानक सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए। पोस्ट और फोटो की बाढ़ सी आ गई।
दारासिंह यादव का आंदोलनकारी अंदाज फिर दिखा
मुलायम सिंह यादव के आंदोलन के दिनों से राजनीति के मैदान में सक्रिय रहे दारासिंह यादव जानते हैं कि किस जगह कैसे उतरना है। उन्होंने अपने पुराने अनुभव का इस्तेमाल किया और सीधे जनता के बीच पहुंच गए। उनकी यह सक्रियता लोगों का ध्यान खींचने लगी।

कुछ नेताओं ने किया विरोध, बताया नौटंकी
दूसरी ओर, पार्टी के कुछ चेहरे उनके इस अंदाज़ से खुश नहीं दिखे। उन्होंने उन्हें नौटंकीबाज और जोकर जैसे शब्द कहे। जबकि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हर रोज भाजपा को चुनौती देने के लिए रणनीति बना रहे हैं, उसी समय दारासिंह यादव मैदान में मजबूती से काम करते दिख रहे हैं।
टिकट लेने वालों की भीड़, काम करने वालों की कमी
बिहार चुनाव के नतीजों के बाद टिकट चाहने वालों की कतार लगातार लंबी होती जा रही है। लेकिन जो नेता असल में जनता के बीच जाते हैं, उनके काम की चर्चा कम होती है। जनता से जुड़ने, उनके सुख दुख में शामिल होने और सही संदेश देने की जरूरत पर कोई ध्यान नहीं देता, बस टिकट की मांग सामने रहती है।
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