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Home » फर्जी पहचान के जाल पर डीसी मनीष ने कसा शिकंजा
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फर्जी पहचान के जाल पर डीसी मनीष ने कसा शिकंजा

October 17, 2025No Comments4 Mins Read
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Pakur (Jaydev Kumar) : झारखंड के पाकुड़ जिले में फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे आधार कार्ड बनाए जाने का मामला अब महज़ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुका है। एक शिकायत से शुरू हुई यह कहानी अब पूरे जिले में फैले फर्जीवाड़े के खिलाफ अभियान का रूप ले चुकी है।

शिकायत से उठा पर्दा, मचा हड़कंप

यह मामला तब सामने आया जब पाकुड़ के ही निवासी तनवीर ने उपायुक्त मनीष कुमार को एक लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप था कि जिले के कुछ गांवों में बाहरी लोगों की मदद से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आधार कार्ड बनवाए जा रहे हैं।

शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। उपायुक्त ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए तत्काल एसडीओ साइमन मरांडी को जांच का आदेश दिया। जांच शुरू हुई तो खुलासे चौंकाने वाले थे — ग्रामीणों के अनुसार, कई बाहरी लोग विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक और असम के सरकारी पहचान पत्रों का उपयोग कर रहे थे, जिनकी मदद से आधार कार्ड बनवाए जा रहे थे।

डीसी मनीष कुमार ने कसा शिकंजा, बनी आठ जांच टीमें

डीसी मनीष कुमार ने पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए आठ विशेष जांच टीमों का गठन कर दिया है। इन टीमों में जिले के सभी प्रखंडों के बीडीओ, सीओ, थाना और आउटपोस्ट प्रभारी शामिल किए गए हैं। तकनीकी सहयोग के लिए यूआईडी सेल के डीपीओ रितेश कुमार श्रीवास्तव को भी जोड़ा गया है। इन टीमों को निर्देश मिला है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में गहन जांच करें, फर्जी दस्तावेज़ों से बनाए गए आधार कार्डों की पहचान करें और पूरे प्रकरण की रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें।

छापेमारी में बड़ा खुलासा : फर्जी पहचान बन रही थी वैध

12 अक्टूबर को एसडीओ साइमन मरांडी, बीडीओ समीर अलफ्रेड मुर्मू और डीपीओ रितेश श्रीवास्तव की उपस्थिति में सदर प्रखंड के कई गांवों में छापेमारी की गई। जांच में पता चला कि कुछ लोग बाहर से आकर यहां फर्जी दस्तावेज़ों की मदद से आधार कार्ड तैयार करा रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि इनमें से कुछ लोग असम, यूपी और कर्नाटक जैसे राज्यों से आए थे। कई मामलों में एक ही पते पर अलग-अलग राज्यों की आईडी लगाकर नया आधार बनाया जा रहा था।

एसडीओ बोले- यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, सुरक्षा के लिए खतरा

एसडीओ साइमन मरांडी ने स्पष्ट कहा कि फर्जी आधार कार्ड बनाना केवल अवैध काम नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और विधि-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। “जब किसी व्यक्ति की पहचान ही फर्जी हो, तो अपराध या आतंक जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण असंभव हो जाता है,” उन्होंने कहा।

फरार हैं आरोपी, लेकिन प्रशासन के रडार पर सब

जांच टीमों के सक्रिय होने के बाद जिन लोगों पर फर्जी आधार कार्ड बनाने का आरोप है, वे पिछले कई दिनों से फरार बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऐसे लोगों को किसी भी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा। सभी प्रखंडों के अधिकारियों को सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जिले भर में सघन जांच अभियान शुरू

डीसी मनीष कुमार ने निर्देश दिया है कि यह जांच सिर्फ सदर प्रखंड तक सीमित नहीं रहेगी। जिले के सभी प्रखंडों में अभियान चलाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार करने वालों की पहचान की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक टीम को विशेष अधिकार दिए गए हैं।

प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि इस तरह के अपराध में यदि कोई अधिकारी या पंचायत स्तर का कर्मचारी शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जनता में चिंता, लेकिन उम्मीद भी

पाकुड़ के लोग इस खुलासे से भले चिंतित हैं, लेकिन प्रशासन की तत्परता से उनमें उम्मीद भी जगी है। एक स्थानीय शिक्षक ने कहा, “पहली बार ऐसा लग रहा है कि प्रशासन वाकई इस तरह के मामलों को गंभीरता से ले रहा है। अगर दोषियों को सजा मिली तो दूसरों को सबक मिलेगा।”

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