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Home » लाल आतंक को सबसे बड़ा झटका : 110 महिला सहित 208 नक्सलियों का सरेंडर, 153 उम्दा हथियार भी सौंपा
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लाल आतंक को सबसे बड़ा झटका : 110 महिला सहित 208 नक्सलियों का सरेंडर, 153 उम्दा हथियार भी सौंपा

October 17, 2025No Comments5 Mins Read
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सरेंडर
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Raipur (Chhatishgarh) : छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य के घने जंगलों में शुक्रवार की सुबह कुछ अलग थी। पेड़ों की सरसराहट में गोलियों की आवाज नहीं, बल्कि नई शुरुआत की फुसफुसाहट थी। वर्षों से हिंसा और भय की छाया में जी रहे इस इलाके में 208 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर उस रास्ते को चुना, जहां संवाद और विकास साथ-साथ चलते हैं।

लाल रास्ते से लौटे 208 नक्सली

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सरेंडर करने वालों में 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल हैं। इनमें से कई नक्सली सालों से अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर के जंगलों में एक्टिव थे। सरेंडर के दौरान इन नक्सलियों ने 153 हथियार अधिकारियों को सौंपे। इन हथियारों में 19 AK-47, 17 SLR, 23 इंसास राइफल, 1 एलएमजी, 36 .303 राइफल, 4 कार्बाइन, 11 बीजीएल लॉन्चर, 41 बारह बोर गन और 1 पिस्तौल शामिल हैं।

सरकार की पुनर्वास योजना के तहत सभी को सुरक्षा, आवास, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं दी जाएंगी। यह कदम न केवल इन व्यक्तियों के लिए नई शुरुआत है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।

#WATCH | Jagdalpur, Chhattisgarh | A total of 208 Naxalites, along with 153 weapons, have been brought to the Police Lines for surrender and rehabilitation. With this, most of Abujhmad will be free from Naxalite influence pic.twitter.com/iRZC2y84S7

— ANI (@ANI) October 17, 2025

अबूझमाड़ से उठी शांति की लहर, उत्तर बस्तर लगभग नक्सल मुक्त

लंबे समय तक नक्सली प्रभाव में रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में प्रशासन की पहुंच बेहद सीमित थी। यहां के गांव दशकों तक सरकारी योजनाओं से दूर रहे। लेकिन हाल के वर्षों में जब सड़कों और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बढ़ी, तो लोगों का भरोसा भी प्रशासन पर लौटने लगा। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद उत्तर बस्तर में नक्सल गतिविधियों का लगभग अंत हो गया है। अब अगला चरण दक्षिण बस्तर में चलाया जाएगा, जहां अभी भी कुछ इलाकों में नक्सली प्रभाव बना हुआ है।

महिला नक्सलियों की बड़ी संख्या बनी कहानी की खास बात

इस सरेंडर में महिलाओं की बड़ी संख्या विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। 110 महिला नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर समाज में लौटने का फैसला किया। इनमें कई वे महिलाएं थीं जिन्होंने किशोरावस्था में नक्सली संगठनों में शामिल होकर वर्षों तक जंगलों में संघर्ष का जीवन जिया। आत्मसमर्पण के दौरान कुछ ने आंखों में आंसू लिए कहा… “हमने बहुत कुछ खोया है, अब अपने बच्चों के लिए कुछ बनाना चाहते हैं।”

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि महिला नक्सलियों को पुनर्वास के साथ-साथ स्वरोजगार और शिक्षा से जोड़ा जाएगा, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- आज संविधान की जीत है

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा, “आज न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए यह गौरव का दिन है। इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों का संविधान और लोकतंत्र में विश्वास जताना, हमारे प्रयासों की सफलता है। ये लोग अब बंदूक नहीं, विकास के हथियार से समाज को आगे बढ़ाएंगे।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दो वर्षों में पूरा छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हो और प्रत्येक गांव तक विकास की किरण पहुंचे।

#WATCH | रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए आज के दिन को ऐतिहासिक दिन कह सकते हैं। आज बहुत बड़ी संख्या में नक्सली हमारे संविधान पर विश्वास करते हुए विकास की धारा से जुड़ने जा रहे हैं। उनका स्वागत है…” https://t.co/OHvcirVXdx pic.twitter.com/LCt6XzpmpC

— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 17, 2025

दस साल की सबसे बड़ी सफलता

सुरक्षा एजेंसियों ने इस आत्मसमर्पण को पिछले एक दशक की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब नक्सल आंदोलन के भीतर के लोग खुद संविधान पर भरोसा जताने लगें, तो यह संकेत है कि अब बदलाव जमीनी स्तर तक पहुंच चुका है। दंडकारण्य के जंगलों में अब स्कूल खुलने लगे हैं, सड़कों पर बच्चे साइकिल से पढ़ने जा रहे हैं और गांवों में स्वास्थ्य शिविर लग रहे हैं। जो क्षेत्र कभी गोलियों और बारूदी सुरंगों से घिरा रहता था, वहां आज लाउडस्पीकर पर राष्ट्रगान की धुन सुनाई देने लगी है।

#WATCH जगदलपुर, छत्तीसगढ़ | कुल 208 नक्सलियों को 153 हथियारों के साथ पुलिस लाइन में आत्मसमर्पण करने और पुनर्वास के लिए लाया गया है। इसके साथ ही अबूझमाड़ का अधिकांश हिस्सा नक्सली प्रभाव से मुक्त हो जाएगा और उत्तरी बस्तर में लाल आतंक का अंत हो जाएगा। pic.twitter.com/0bNr6ybXSn

— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 17, 2025

‘गोलियों से नहीं, संवाद से बदलेगा बस्तर’

छत्तीसगढ़ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह आत्मसमर्पण दिखाता है कि हिंसा का कोई भविष्य नहीं। जब तक संवाद नहीं होगा, तब तक शांति संभव नहीं। यह सिर्फ पुलिस की सफलता नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक प्रयासों की जीत है।” आज दंडकारण्य में सूरज पहले की तरह ही उगा, लेकिन यह सुबह अलग थी… क्योंकि आज बंदूकें नहीं, उम्मीदें चमक रही थीं।

इसे भी पढ़ें : सीमेंट कारोबारी पर फा’यरिंग मामला : बिल्डर और जमीन कारोबारी पुलिस कस्टडी में

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