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Ranchi : रांची व्यवहार न्यायालय का गलियारा सोमवार की सुबह कुछ अलग माहौल लिए हुए था। ठंडी हवा के बीच लोग अपने-अपने केस फाइलें पकड़े बैठे थे, लेकिन चेहरों पर उम्मीद की एक हल्की चमक भी थी। वजह था पांच दिन चलने वाला विशेष मध्यस्थता अभियान। कई परिवार इस उम्मीद में पहुंचे थे कि शायद आज उनके जीवन की दिशा बदल जाए।
जहां परिवार टूटते नहीं, फिर से जुड़ने की कोशिश करते हैं
अभियान का मकसद सिर्फ कानूनी निस्तारण नहीं है। यहां आने वाले लोग अपने रिश्तों की थकी हुई गांठें खोलने की कोशिश करते हैं। तलाक, भरण पोषण, बच्चों की देखभाल, घरेलू विवाद, दहेज और 498ए जैसे मामलों में उलझे लोग यहां समाधान की तलाश में आते हैं।
विशेषज्ञ मध्यस्थ और अधिवक्ता दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुनते हैं। कई बार एक शांत कमरे में बैठकर कही गई कुछ सरल बातें पुराने तनाव को हल्का कर देती हैं।
एक कमरा, दो लोग और कई भावनाएं
पहले दिन का माहौल देखने लायक था। 54 मामले अलग-अलग अदालतों से यहां पहुंचे थे। हर कमरे में दो पक्ष आमने सामने बैठे थे। बीच में एक मध्यस्थ। कहीं आंखों में गुस्सा था, कहीं बरसों का दर्द। कहीं रिश्तों को बचाने की कोशिश चल रही थी, कहीं अलग होने का फैसला आसान बन रहा था। लेकिन सबसे खास था राहत का वो पल, जब 51 मामलों में दोनों पक्ष आपसी सहमति से एक ही निष्कर्ष पर पहुंचे। कुछ लोग आंसू पोंछते हुए बाहर निकले, कुछ के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। कई माता-पिता अपने बच्चों के लिए सही फैसला ले पाए।
लोग अपने संघर्ष से बाहर निकलें, यही है मकसद : रवि भास्कर
अभियान पर नजर रखने वाले डालसा सचिव रवि कुमार भास्कर कहते हैं, “वादकारियों का दर्द कम करना हमारा मकसद है। हम चाहते हैं कि लोग अनिश्चितता और तनाव से बाहर आ सकें। मध्यस्थों और अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी बड़ी होती है, क्योंकि वे सिर्फ केस नहीं सुलझाते, वे जिंदगियों को संभालते हैं।”
रांची के इस अभियान ने कई घरों में लौटाई शांति
इस खास अभियान में सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं चल रही, यहां मन से मन जोड़ने की कोशिश भी होती है। कुछ रिश्ते वक्त पर थाम लिए जाते हैं, कुछ लोग गरिमा के साथ अलग होने का रास्ता चुन लेते हैं। पहले दिन की सफलता इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में और भी परिवारों को राहत मिल सकती है। 12 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान से कई घरों का बोझ कम होने की उम्मीद है।
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