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Ranchi (Pawan Thakur) : 31 जनवरी की शाम हरिहर महतो घर से निकला तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह उसकी जिंदगी की आखिरी शाम होगी। उसने बस इतना कहा था कि वह थोड़ी देर में घर लौट आएगा। परिवार को क्या पता था कि जिस भरोसे के साथ वह दरवाजा पार कर रहा है, उसी भरोसे का इस्तेमाल कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी जाएगी।
एक आम युवक, साधारण सपने
हरिहर महतो कोई अपराधी नहीं था। गांव में रहने वाला एक साधारण युवक, जो रोजमर्रा की जिंदगी, काम और रिश्तों के बीच अपनी दुनिया बुन रहा था। परिवार के लिए वह बेटा था, भाई था, उम्मीद था। लेकिन उसकी जिंदगी एक ऐसे रिश्ते में उलझ गई, जिसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
प्यार, जो चोरी-छिपे पनपा
हरिहर का अपने ही गांव की शादीशुदा महिला सुलोचना देवी से प्रेम संबंध था। दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी, मुलाकातें होती थीं। यह रिश्ता चोरी-छिपे चल रहा था, लेकिन गांव और घर की दीवारों के बीच कोई बात ज्यादा दिन छिपी नहीं रहती। सुलोचना के पति क्षेत्रपति महतो को जब इस संबंध की भनक लगी, तो मामला सवाल-जवाब से आगे निकल गया।
पति-पत्नी और खौफनाक फैसला
पुलिस जांच में सामने आया कि गुस्सा, अपमान और डर ने मिलकर एक खतरनाक साजिश को जन्म दिया। पति-पत्नी ने तय कर लिया कि हरिहर को रास्ते से हटाना ही एकमात्र समाधान है। यहीं से प्रेम की कहानी, हत्या की साजिश में बदल गई।
एक फोन कॉल और मौत का बुलावा
योजना के तहत सुलोचना देवी ने हरिहर को फोन किया। आवाज वही थी, भरोसा वही था। हरिहर बिना किसी डर के तय जगह पर पहुंच गया।
लेकिन वहां उसका इंतजार प्यार नहीं, बल्कि मौत कर रही थी। मौके पर पहले से मौजूद थे सुलोचना, उसका पति क्षेत्रपति और उनका एक साथी।
हमला और इंसानियत की हत्या
जैसे ही हरिहर पहुंचा, उस पर हमला कर दिया गया। वह संभल भी नहीं पाया। पुलिस के मुताबिक हत्या के बाद जो किया गया, उसने इंसानियत को अंदर से झकझोर कर रख दिया। हरिहर का सिर धड़ से अलग कर दिया गया। उसके शरीर के टुकड़े कर दिए गए। प्राइवेट पार्ट को भी बदन से काट कर अलग कर दिया गया। पहचान और सबूत मिटाने के इरादे से लाश को बेतरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
लाश को छिपाने की कोशिश
संदेही गुनहगारों ने शव को कांची नदी के किनारे झाड़ियों के बीच दलदल में दबा दिया। ऊपर से मिट्टी डाल दी गई, मानो एक इंसान नहीं, बल्कि कोई बोझ दफनाया जा रहा हो। उन्हें लगा कि सच भी इसी मिट्टी में दब जाएगा।
घर में इंतजार, आंखों में सवाल
इधर घर में हरिहर का इंतजार होता रहा। 31 जनवरी की रात बीती, फिर अगली सुबह। फोन बंद मिला। परिजनों ने रिश्तेदारों, दोस्तों, गांव के कोने-कोने में तलाश की। जब कुछ पता नहीं चला तो 3 फरवरी को सोनाहातू थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
तकनीक बनी सच की आवाज
रांची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर रूरल एसपी प्रवीण पुष्कर की देखरेख और बुंडू एसडीपीओ ओम प्रकाश के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई। मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन की तकनीकी जांच शुरू हुई। जांच की सुई बार-बार सुलोचना देवी पर जाकर रुक रही थी।
कड़ी पूछताछ में सुलोचना और उसके पति टूट गए और जुर्म कबूल कर लिया।
सबूत, जो कहानी बयां कर गए
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई बांस की बल्ली, खून से सना काले रंग का दुपट्टा, दो मोबाइल फोन
बरामद किए। हर सबूत, उस रात की खामोश चीखें बयां कर रहा था।
जेल की सलाखों के पीछे संदेही गुनहगारों
पुलिस ने सुलोचना देवी और क्षेत्रपति महतो को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बुंडू एसडीपीओ ओम प्रकाश के अनुसार मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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