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Pakur (Jaydev Kumar) : गांव की पगडंडियों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक, अब हर जगह एक नई ऊर्जा महसूस की जा सकती है। यह ऊर्जा उन ‘सखी दीदियों’ की है, जो कभी घर की चौखट तक सीमित थीं, लेकिन अब समाज में बदलाव की अगुआई कर रही हैं। उनके चेहरों पर आत्मविश्वास है, आंखों में सपने हैं और दिल में अपने गांव-समाज को बेहतर बनाने का जुनून है। सखी दिवस का आयोजन इन दीदियों के प्रयासों और संघर्षों को सलाम करने का ही एक अवसर बन गया।
आप ही बदलाव की असली शक्ति हैं : DC
प्रोजेक्ट बदलाव के तहत जिले के सभी सखी मंडलों और ग्राम संगठनों में सखी दिवस मनाया गया। महेशपुर प्रखंड के गढ़वाड़ी संकुल में हुए मुख्य कार्यक्रम में दीदियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने इस दिन को खास बना दिया। कार्यक्रम में पाकुड़ के DC मनीष कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर सभी दीदियों को बधाई दी और कहा – “आप ही बदलाव की असली शक्ति हैं। जिस दिन हर घर में स्वच्छता और पोषण की जागरूकता पहुंचेगी, उस दिन हमारा समाज और मजबूत होगा।”

पोषण, स्वच्छता और सेहत – नए युग की नींव
इस अवसर पर DC मनीष कुमार ने कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।
- पोषण माह (17 सितंबर–16 अक्टूबर) : बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण सुधार की पहल।
- स्वच्छता पखवाड़ा 2025 : गांव-गांव में सखी दीदियाँ बनेंगी स्वच्छता की संदेशवाहक।
- स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार : सभी दीदियों से स्वास्थ्य जांच कराने की अपील।
इन पहलों ने साफ कर दिया कि दीदियों की भूमिका अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन में भी अहम है।
हर माह की 22 तारीख को होगा ‘बाल भोज’
कार्यक्रम में नई घोषणाएं भी हुईं। हर माह की 22 तारीख को आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘बाल भोज’ होगा, जहां बच्चों के जन्मदिन सामूहिक रूप से मनाए जाएंगे। नवंबर में खेलकूद, कुकिंग, सिलाई-कढ़ाई और चॉकलेट बनाने जैसी प्रतियोगिताएँ होंगी, ताकि दीदियां अपने हुनर को और निखार सकें।
जीवन बचाने का संकल्प दिला गये DC
24 सितंबर को जिले के सभी प्रखंडों में रक्तदान शिविर आयोजित होगा। DC ने दीदियों से अपील की कि वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और इस मानवीय कार्य में समाज के लिए नई मिसाल कायम करें। उन्होंने यह भी कहा कि कालाजार जैसी बीमारियों के उन्मूलन में दीदियों की अहम भूमिका होगी।
आर्थिक सशक्तिकरण की नई उड़ान
सखी दिवस के इस अवसर पर गढ़वाड़ी संकुल स्तरीय प्राथमिक स्वावलंबी सहयोग समिति लिमिटेड को 76 लाख रुपये की सामुदायिक निवेश निधि सौंपी गई। यह राशि महिलाओं को छोटे-छोटे उद्यम खड़े करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगी।
उम्मीदों से भरा भविष्य
मौके पर बीडीओ सिद्धार्थ शंकर यादव, अंचलाधिकारी संजय सिन्हा, जेएसएलपीएस डीपीएम प्रवीण मिश्रा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम ने एक बात साफ कर दी – जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो वे सिर्फ अपने घर नहीं, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल देती हैं। गांव की मिट्टी से उठी यह ‘सखी आवाज़’ अब एक आंदोलन बन चुकी है। यह आंदोलन न सिर्फ महिलाओं की जिंदगी बदल रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक नई उम्मीद जगाता है।
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