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Ranchi : रांची मंडल में रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ का नाम आते ही जिस अधिकारी की छवि सबसे पहले सामने आती है, उनमें कमांडेंट पवन कुमार का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। शांत स्वभाव, सख्त अनुशासन और तेज निर्णय क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले पवन कुमार अब रांची मंडल को अलविदा कह रहे हैं। उन्हें पदोन्नति देकर सीनियर कमांडेंट बनाया गया है और उनकी नई पोस्टिंग आसनसोल में की गई है। उनकी विदाई सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे रांची मंडल के लिए एक भावनात्मक पल के तौर पर भी देखा जा रहा है। क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने सिर्फ एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि पूरी आरपीएफ टीम के अभिभावक की तरह काम किया।
सुरक्षा व्यवस्था को बनाया मजबूत
रेलवे की दुनिया हमेशा चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। हर दिन हजारों यात्रियों की आवाजाही, स्टेशन परिसर की निगरानी, ट्रेनों में अपराध रोकना और आपात स्थिति से निपटना आसान काम नहीं होता। लेकिन पवन कुमार के नेतृत्व में रांची मंडल की आरपीएफ टीम ने इन चुनौतियों को मजबूती से संभाला। उनके कार्यकाल में रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया। संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। कई बार अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई कर यात्रियों का भरोसा भी जीता गया। आरपीएफ के जवान बताते हैं कि पवन कुमार हर छोटी-बड़ी जानकारी पर खुद नजर रखते थे। वे सिर्फ आदेश देने वाले अधिकारी नहीं थे, बल्कि मौके पर पहुंचकर स्थिति समझने और टीम का हौसला बढ़ाने में भी आगे रहते थे।
यात्रियों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता
रांची मंडल से रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। पवन कुमार ने इस जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाया। रेलवे परिसरों में गश्त बढ़ाई गई। महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी रखी गई। ट्रेनों में चोरी, छिनतई और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए लगातार अभियान चलाए गए। यही वजह रही कि उनके कार्यकाल में रांची मंडल में कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। इसे उनकी सतर्कता और मजबूत निगरानी व्यवस्था का परिणाम माना जा रहा है।
जवानों के लिए सिर्फ अधिकारी नहीं, मार्गदर्शक भी रहे
आरपीएफ जवानों के बीच पवन कुमार की पहचान एक ऐसे अधिकारी की रही, जो अनुशासन के साथ मानवीय सोच भी रखते थे। वे जवानों की परेशानियां सुनते थे और समाधान निकालने की कोशिश करते थे। कई जवान बताते हैं कि कठिन ड्यूटी के दौरान भी वे टीम का मनोबल बनाए रखते थे। समय-समय पर जवानों को प्रेरित करना और बेहतर कार्य संस्कृति तैयार करना उनकी खासियत रही। उनके नेतृत्व में टीमवर्क को काफी महत्व मिला। यही कारण रहा कि रांची मंडल की आरपीएफ टीम लगातार बेहतर प्रदर्शन करती रही।
आधुनिक तकनीक पर भी दिया जोर
पवन कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था को सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने आधुनिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया। स्टेशन परिसरों में निगरानी व्यवस्था बेहतर की गई। सुरक्षा से जुड़े कई तकनीकी उपायों को लागू किया गया, ताकि यात्रियों को सुरक्षित माहौल मिल सके। उनकी सोच साफ थी कि बदलते समय के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक बनाना जरूरी है।
विदाई के बीच भावुक हुआ मंडल
जैसे ही उनके पदोन्नति और तबादले की खबर सामने आई, रांची मंडल के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। कई कर्मचारियों ने कहा कि उनके साथ काम करना एक सीखने जैसा अनुभव रहा। आरपीएफ जवानों के बीच चर्चा रही कि पवन कुमार ने हमेशा टीम को परिवार की तरह जोड़े रखा। यही वजह है कि उनकी विदाई के मौके पर भावुक माहौल देखने को मिला।
आसनसोल में भी रहेगी बड़ी जिम्मेदारी
अब पवन कुमार सीनियर कमांडेंट के रूप में आसनसोल में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि वे वहां भी अपनी कार्यशैली और अनुभव से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।
रांची मंडल के लोग उन्हें सिर्फ एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे नेतृत्वकर्ता के रूप में याद करेंगे जिन्होंने सुरक्षा, अनुशासन और भरोसे को एक साथ मजबूत किया।

