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Ranchi : अच्छी सैलरी और विदेश में चमकदार करियर का सपना दिखाकर झारखंड के युवाओं को बैंकॉक भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उनका पासपोर्ट छीन लिया गया और उन्हें साइबर ठगी कराने वाले सेंटर में बंद कर दिया गया। झारखंड CID की रांची साइबर क्राइम थाना ने इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा किया है। इस मामले में जमशेदपुर के आजादनगर थाना क्षेत्र से सरताज आलम को गिरफ्तार किया गया है।
ऐसे फंसाए जाते थे युवा
CID डीएसपी नेहा बाला ने मीडिया को बताया कि जांच में सामने आया है कि अनधिकृत एजेंट बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे। उन्हें कहा जाता था कि बैंकॉक, कंबोडिया, लाओस या थाईलैंड में डाटा एंट्री और अन्य काम है, सैलरी भी बढ़िया मिलेगी। वीजा और टिकट के नाम पर मोटी रकम ली जाती थी। घरवाले भी सोचते थे कि बेटा विदेश जा रहा है, जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन असली खेल विदेश पहुंचने के बाद शुरू होता था।
विदेश पहुंचते ही बदल जाता था सब कुछ
पीड़ितों ने CID को बताया कि एयरपोर्ट से सीधे उन्हें एक कंपाउंड में ले जाया जाता था। वहां उनका पासपोर्ट रख लिया जाता था। बाहर निकलने की इजाजत नहीं होती थी। फिर उन्हें ट्रेनिंग दी जाती थी कि कैसे व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल बनानी है और विदेशी नागरिकों से दोस्ती कर उन्हें निवेश के नाम पर फंसाना है। उन्हें स्क्रिप्ट दी जाती थी कि क्या बोलना है, कैसे भरोसा जीतना है और कैसे फर्जी निवेश ऐप का लिंक भेजकर पैसे मंगवाने हैं।
‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश घोटाले का खेल
गिरोह के लोग विदेशी नागरिकों को मैसेज कर कहते थे कि आपके खिलाफ मामला दर्ज है या आपके पैसे फंसे हैं। कभी निवेश का लालच दिया जाता था। लोगों को अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता था। यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से चलता था और भारत से ले जाए गए युवाओं से दिन-रात काम कराया जाता था। करीब 11 पीड़ितों की पहचान अब तक हुई है। कई को मानसिक दबाव में रखा गया, कुछ को धमकाया भी गया।
जमशेदपुर से हुई गिरफ्तारी
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जमशेदपुर के आजादनगर इलाके का रहने वाला सरताज आलम विदेश में बैठे सहयोगियों से मिलकर युवाओं की भर्ती करता था। जमशेदपुर पुलिस के सहयोग से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उससे पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं।
कई धाराओं में केस दर्ज
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 (B), 66 (C), 66 (D) और Emigration Act की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं।
अभी और खुलासे संभव
CID डीएसपी नेहा बाला का कहना है कि यह सिर्फ एक गिरफ्तारी है। नेटवर्क बड़ा है और कई लोग इसमें शामिल हो सकते हैं। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। संभावना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हों।
पुलिस की साफ चेतावनी
झारखंड पुलिस ने लोगों से साफ कहा है कि विदेश में नौकरी के नाम पर काम करने वाले अनधिकृत एजेंटों से सावधान रहें।
अगर कोई भी संदिग्ध ऑफर मिले तो पहले पूरी जांच करें। किसी भी साइबर ठगी या धोखाधड़ी की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें या आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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