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Pakur (Jaydev Kumar) : बेल पहाड़ी… नाम भले ही शांत पहाड़ियों का अहसास दिलाए, लेकिन इन दिनों यहां सन्नाटा नहीं, तनाव की आवाज़ें गूंज रही हैं। पत्थर की खदानों से निकलती धूल और धमाकों की गूंज ने इस छोटे से गांव की नींद, शांति और भरोसा – तीनों छीन लिए हैं। रविवार को जब एक बार फिर खदान में हैवी ब्लास्टिंग हुई, तो गांव की दीवारें हिल गईं — और फिर फूट पड़ा गुस्सा।
ब्लास्टिंग से डरा गांव, दरक गए मकान
हिरणपुर प्रखंड के इस बेल पहाड़ी गांव में पत्थर खनन का काम लंबे समय से चल रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि खदान में अक्सर इतनी तेज़ ब्लास्टिंग होती है कि घरों की दीवारों में दरारें पड़ जाती हैं। “हमने कई बार मना किया, लेकिन कोई सुनता नहीं,” गांव के बुजुर्ग रामचंद्र टुडू कहते हैं, “आज की ब्लास्टिंग से मेरी दीवार गिर गई। बच्चे डर के मारे घर से बाहर भागे।”
गुस्से में फूट पड़ा पथराव
घटना के बाद जब ग्रामीण खदान के पास विरोध जताने पहुंचे, तो वहां मौजूद खनन पट्टाधारी अजहर इस्लाम के कर्मचारी और सुरक्षा गार्डों से कहासुनी हो गई। पलभर में माहौल गरम हो गया और देखते ही देखते दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया। ईंट-पत्थरों की बारिश में कई वाहनों के शीशे चटक गए, कुछ ग्रामीण और मजदूर घायल हो गए। गांव के युवा संतोष हांसदा बताते हैं… “हम सिर्फ बात करने गए थे, लेकिन उन्होंने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। फिर पथराव हुआ और सबकुछ बिगड़ गया।”
पट्टाधारी बोले– ‘हम पर भी हमला हुआ’
दूसरी ओर, पत्थर खदान के पट्टाधारी अजहर इस्लाम का कहना है कि ग्रामीणों ने बिना वजह खदान पर हमला किया और वाहनों को तोड़फोड़ कर दिया। “हम तो काम कर रहे थे। अचानक भीड़ आई और हमला कर दिया। हमारे मजदूरों को भी चोट आई है,” उन्होंने पुलिस को दिए बयान में कहा।
पाकुड़ में हेवी ब्लास्टिंग से दरकी दीवारें, फिर भयंकर बवाल से दहला गांव pic.twitter.com/tHM5R1Sd28
— News Samvad (@newssamvaad) October 26, 2025
पुलिस ने पहुंचकर शांत कराया माहौल
घटना की सूचना मिलते ही हिरणपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर किसी तरह स्थिति को काबू में किया। दोनों ओर से लिखित शिकायतें दर्ज की गई हैं और जांच जारी है। थाना प्रभारी ने बताया, “दोनों पक्षों के आरोपों की जांच की जा रही है। किसी को भी कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा।”
गांव की मांग – ब्लास्टिंग पर रोक और मुआवजा
अब गांव में माहौल शांत जरूर है, लेकिन दिलों में डर और गुस्सा अब भी है। ग्रामीणों की मांग है कि खदान में की जाने वाली हैवी ब्लास्टिंग पर रोक लगे और मकानों को हुए नुकसान का मुआवजा मिले। “हम पत्थर नहीं चाहते, बस अपने घरों की सुरक्षा चाहते हैं,” महिला व्रती सीता देवी कहती हैं, “हर ब्लास्टिंग के बाद लगता है कि पूरा घर गिर जाएगा।”
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