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Ranchi : शराब की एक गाड़ी कहीं से चली और रास्ते में कहां-कहां रुकी, किस रास्ते से गई और आखिर पहुंची कहां, अब इसकी जानकारी छिपी नहीं रहेगी। झारखंड सरकार शराब की ढुलाई व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की तैयारी में है। शराब ले जाने वाले गाड़ियों में GPS ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक लगाने की योजना पर काम होगा। यानी गाड़ी की आवाजाही पर विभाग की नजर रहेगी और रास्ते में होने वाली किसी भी गड़बड़ी का पता लगाना आसान होगा।
सीएम हेमंत सोरेन ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश दिया है। बैठक में सिर्फ राजस्व की बात नहीं हुई, बल्कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर चर्चा हुई। शराब बनती कहां है, स्टोर कैसे होती है, किस रास्ते से पहुंचती है और तस्करी कैसे होती है, इन सभी स्तरों पर निगरानी मजबूत करने की बात कही गई।
सरकार की चिंता सिर्फ राजस्व की नहीं, लोगों की जान भी दांव पर
अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। कई बार जहरीली शराब पीने से लोगों की जान चली जाती है। ऐसी शराब में क्या मिलाया गया है, इसे लेकर कोई भरोसा नहीं होता। सीएम हेमंत सोरेन ने भी समीक्षा बैठक में इस खतरे को गंभीरता से लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अवैध शराब का निर्माण, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, बिक्री और तस्करी पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। उनका कहना है कि यह कारोबार सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता ही है, साथ ही लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन जाता है। यही वजह है कि अब कार्रवाई सिर्फ छापेमारी तक सीमित रखने के बजाय पूरे नेटवर्क पर नजर रखने की तैयारी है।

लक्ष्य 3885 करोड़ का था, कमाई 4013 करोड़ से ज्यादा हुई
उत्पाद विभाग सरकार के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत है। समीक्षा बैठक में विभाग की कमाई का भी हिसाब सामने आया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 3,885.11 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया गया था। विभाग ने लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए 4,013.53 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया। अब सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों ने बताया कि जुलाई 2026 के मध्य तक 1,376 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह हो चुका है। यह सालाना लक्ष्य का 30.57 प्रतिशत है। सरकार की कोशिश है कि राजस्व बढ़े, लेकिन इसके साथ अवैध शराब के कारोबार पर भी प्रभावी रोक लगे।
शराब की गाड़ी रास्ते में रुकी तो विभाग को पता चलेगा
अभी किसी शराब परिवहन वाहन की निगरानी के लिए अधिकारियों को कागजी रिकॉर्ड और मौके की जांच पर काफी निर्भर रहना पड़ता है। GPS और डिजिटल लॉक की व्यवस्था लागू होने के बाद यह व्यवस्था काफी बदल सकती है। गाड़ी किस रास्ते से जा रही है, कितनी देर कहां रुकी और तय जगह पर पहुंची या नहीं, इसकी जानकारी डिजिटल तरीके से मिल सकेगी। अगर गाड़ी तय रूट से हटती है या किसी संदिग्ध जगह पर रुकती है तो विभाग को इसकी जानकारी मिल सकती है। डिजिटल लॉक से भी छेड़छाड़ की संभावना कम होगी। सरकार की कोशिश है कि शराब की ढुलाई की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
स्पिरिट की मांग बढ़ी तो सरकार पहले से बनाएगी योजना
बैठक में स्पिरिट की खपत को लेकर भी चर्चा हुई। सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि राज्य में स्पिरिट की मौजूदा खपत और आने वाले समय की मांग का अध्ययन किया जाए। स्पिरिट का इस्तेमाल सिर्फ शराब बनाने में ही नहीं, बल्कि कई औद्योगिक कामों में भी होता है। इसलिए सरकार यह समझना चाहती है कि आने वाले समय में इसकी मांग कितनी बढ़ सकती है, इसका औद्योगिक उपयोग कितना है और इससे राजस्व बढ़ाने की कितनी संभावना है। इसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
शराब बनाने की नीति भी नए सिरे से तैयार करने की तैयारी
सीएम हेमंत सोरेन ने अलग-अलग तरह की मदिरा के विनिर्माण से जुड़ी नीति बनाने का निर्देश दिया है। औद्योगिक अल्कोहल के नियमन के लिए भी अलग नीति तैयार करने को कहा गया है। इसके अलावा लेबल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया। इसका मकसद यह है कि लोकप्रिय ब्रांडों की उपलब्धता के लिए प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल न हो। सरकार की कोशिश है कि जहां वैध कारोबार को सुविधा मिले, वहीं अवैध कारोबार के लिए रास्ते बंद किए जाएं।
583 उत्पाद सिपाहियों की नियुक्ति जल्द
उत्पाद विभाग में कर्मचारियों की कमी को भी सीएम हेमंत सोरेन ने गंभीरता से लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खाली पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। विभाग में पर्याप्त कर्मचारी होंगे तो अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई, निगरानी और जांच का काम भी तेजी से हो सकेगा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि JSSC के माध्यम से चयनित 583 उत्पाद सिपाहियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इन नियुक्तियों से विभाग को जमीनी स्तर पर अतिरिक्त ताकत मिलने की उम्मीद है।
गोदाम बनेंगे तो स्थानीय लोगों को भी मिलेगा काम
राज्य के अलग-अलग जिलों में उत्पाद विभाग के गोदाम बनाए जा रहे हैं। सीएम हेमंत सोरेन ने इन निर्माण कार्यों में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को रोजगार के रूप में मिल सकता है। सरकार का मानना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ने से गांवों में रोजगार के अवसर बनेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि विभाग के कामकाज को सिर्फ राजस्व जुटाने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसका फायदा स्थानीय लोगों और राज्य के विकास को भी मिले।
तकनीक से लेकर मानवबल तक, पूरी व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश
इस समीक्षा बैठक में सरकार का फोकस साफ नजर आया। एक तरफ अवैध शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात हुई, तो दूसरी तरफ विभाग को तकनीक और कर्मचारियों से मजबूत करने पर जोर दिया गया। GPS और डिजिटल लॉक से परिवहन पर नजर रखने की तैयारी है। नई नीतियों से वैध कारोबार को व्यवस्थित करने की कोशिश होगी। खाली पदों पर नियुक्ति से विभाग को अतिरिक्त मानवबल मिलेगा। वहीं, गोदाम निर्माण में स्थानीय लोगों की भागीदारी से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यानी सरकार अब उत्पाद विभाग को सिर्फ शराब की बिक्री और राजस्व संग्रह करने वाले विभाग के तौर पर नहीं, बल्कि निगरानी, नीति और तकनीक के जरिए पूरी व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले विभाग के रूप में मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल, उत्पाद आयुक्त संदीप सिंह, जेएसबीसीएल के एमडी नीरज कुमार सिंह, संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र कुमार सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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