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News Samvad : आयकर विभाग और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की सख्ती का असर साफ नजर आने लगा है। असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए अब तक 15 लाख से ज्यादा करदाताओं ने अपनी आयकर रिटर्न में की गई गलतियों को सुधारते हुए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल किया है। विभाग के अनुसार यह आंकड़ा टैक्स अनुपालन में बढ़ती गंभीरता को दर्शाता है।
अपडेटेड रिटर्न से सरकार को मिला अतिरिक्त टैक्स
चालू वित्त वर्ष में 21 लाख से अधिक करदाताओं ने अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U दाखिल किया है। इसके जरिए सरकार के खजाने में करीब 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स जमा हुआ है। आयकर विभाग का कहना है कि डेटा एनालिटिक्स के जरिए गड़बड़ियों की पहचान की जा रही है।
गलत डिडक्शन और फर्जी चंदे पर विभाग की नजर
CBDT की जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में करदाताओं ने टैक्स बचाने के लिए गलत डिडक्शन क्लेम किए। खासतौर पर गैर मान्यता प्राप्त या निष्क्रिय राजनीतिक दलों को चंदा दिखाकर टैक्स छूट ली गई थी। इन मामलों में विभाग ने नज अभियान की शुरुआत की।
ईमेल और एसएमएस के जरिए दी गई चेतावनी
आयकर विभाग ने 12 दिसंबर से संदिग्ध डिडक्शन क्लेम करने वाले करदाताओं को ईमेल और एसएमएस भेजकर सावधान किया। विभाग ने बताया कि कुछ राजनीतिक पार्टियों का इस्तेमाल बोगस रसीद, हवाला लेनदेन और काले धन को सफेद करने के लिए किया जा रहा था।
31 दिसंबर 2025 तक सुधार का मौका
आयकर विभाग ने साफ कहा है कि अगर किसी करदाता ने गलत डिडक्शन या छूट क्लेम की है, तो वह 31 दिसंबर 2025 तक बिना जुर्माने के रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है। इसके बाद गलती सुधारने का विकल्प महंगा पड़ सकता है।
जनवरी 2026 से बढ़ सकती है परेशानी
जनवरी 2026 से करदाता केवल अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर पाएंगे। ऐसी स्थिति में टैक्स के साथ अतिरिक्त जुर्माना और ब्याज भी देना पड़ सकता है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्शन 80G और राजनीतिक चंदे से जुड़े सभी क्लेम को एक बार जरूर जांच लें।
समय रहते सुधार करना बेहतर
भले ही आयकर विभाग की ओर से नोटिस न मिला हो, लेकिन समय रहते रिटर्न की समीक्षा करना समझदारी होगी। 31 दिसंबर के बाद गलती सुधारने की प्रक्रिया और ज्यादा कठिन हो जाएगी।
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