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Ranchi : 734 करोड़ रुपए के फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले में ईडी ने जमशेदपुर के जाने-माने स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। रांची ईडी की टीम ने बुधवार को जमशेदपुर, देवघर और कोलकाता के कई ठिकानों पर एक साथ छापा मारा था। दिनभर चली लंबी पूछताछ और पड़ताल के बाद देर रात बाप-बेटे को हिरासत में ले लिया गया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को मेडिकल जांच के लिए एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों ने जमकर हंगामा काटा। बबलू जायसवाल ने खुद को बेकसूर बताते हुए फंसाए जाने का आरोप लगाया और कहा कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है और उन्हें दवा तक नहीं दी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ईडी की टीम दोनों को सुरक्षा घेरे में लेकर रांची रवाना हो गई।
70 अफसरों की टीम ने सीए दफ्तर समेत छह ठिकानों को खंगाला
ईडी की एंटी मनी लॉन्ड्रिंग टीम ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर, आदित्यपुर, गम्हरिया और पश्चिम बंगाल के हावड़ा समेत छह जगहों पर यह बड़ी कार्रवाई की। इस पूरे ऑपरेशन में 70 से ज्यादा अफसर और कर्मचारी जुटे थे, जिनकी सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस को तैनात किया गया था। जांच टीम ने बिष्टुपुर के कांट्रैक्टर्स एरिया में बबलू जायसवाल के घर और मुख्य दफ्तर पर दबिश दी। इसके साथ ही बीएस टावर में उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय पारेख के दफ्तर और आदित्यपुर स्थित मेसर्स सारा एडोस के प्लांट पर भी तलाशी ली गई। पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई इस कार्रवाई में ईडी ने कई कंपनियों के बैंक खाते, खरीद-बिक्री के बिल, जीएसटी रिटर्न और डिजिटल डेटा जब्त किया है। अफसरों ने दफ्तरों से कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए हैं ताकि मिटाए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सके।
37 फर्जी कंपनियों से 5 हजार करोड़ के बिल, जांच में उलझे कई नाम
ईडी की पड़ताल में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में 37 कागजी यानी शेल कंपनियां खड़ी की गई थीं। इनके जरिए करीब 5,000 करोड़ रुपए के फर्जी चालान काटे गए और बिना किसी माल की सप्लाई के ही 734 करोड़ रुपए का आईटीसी क्लेम कर लिया गया। जीएसटी इंटेलिजेंस की शुरुआती जांच के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। एजेंसी का कहना है कि इस गिरोह में अमित उर्फ निक्की भालेरिया, कोलकाता के शिवकुमार देवड़ा उर्फ मोदित देवड़ा और अमित गुप्ता भी शामिल हैं। सीए संजय पारेख के दफ्तर से मिले ऑडिट पेपर, जीएसटी लॉग और बैलेंस शीट की जांच से यह साफ करने की कोशिश हो रही है कि इस फर्जीवाड़े में पेशेवर स्तर पर कितनी मिलीभगत थी।
डमी डायरेक्टर से खुली पोल, रियल एस्टेट में खपाया जा रहा था पैसा
बबलू जायसवाल से जुड़ी कई अन्य फर्में भी अब जांच के घेरे में आ चुकी हैं, जिनमें मेसर्स जय भोलानाथ, मेसर्स मां शारदा पावर, मेसर्स मेकर्स कास्टिंग, मेसर्स केदारनाथ टेक्सटाइल्स और मेसर्स जानदीप आयरन एंड स्टील शामिल हैं। अगस्त 2025 में सरायकेला के कारोबारी पंचानंद सरदार के यहां पड़े छापों से मिले सुराग के बाद यह बात सामने आई थी कि कागजों पर डमी डायरेक्टर बैठाए गए थे, जबकि कंपनियों की पूरी कमान बबलू जायसवाल खुद संभाल रहे थे। इससे पहले भी उनकी कंपनियों के जरिए 55 करोड़ रुपए के संदिग्ध आईटीसी का खेल पकड़ा गया था। अब ईडी हावड़ा में बेटे राज जायसवाल के नेटवर्क और रियल एस्टेट में लगाए गए रुपयों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घोटाले की यह मोटी रकम कहां-कहां छिपाई गई है।
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