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News Samvad : बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में जो हुआ, उसने विमान में सवार 174 लोगों की जान को कुछ ही पलों में खतरे में डाल दिया। उड़ान के दौरान कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद विमान अचानक तेजी से नीचे जाने लगा। करीब 30 सेकंड में विमान की ऊंचाई लगभग 14,000 फीट तक कम हो गई। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपनी सीटों से उछल गए।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम पल वह था, जब गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित ने अपनी बची हुई ताकत से कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसी एक फैसले ने यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचने का मौका दिया। इसके बाद कुछ यात्रियों ने हमलावर को काबू किया और विमान को सुरक्षित उतारने की राह खुली। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित के इस कदम की तारीफ करते हुए उन्हें सच्चा हीरो बताया।
अचानक कॉकपिट में शुरू हुई चाकूबाजी, 14 हजार फीट नीचे गिरा विमान
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के करीब दो घंटे बाद कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच अचानक झगड़ा शुरू हो गया। इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, ओमानी नागरिक सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला किया। इसके बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा।
विमान कुछ ही समय में करीब 14,000 से 17,000 फीट तक नीचे चला गया। हालात इतने गंभीर थे कि इजराइली अधिकारियों ने विमान से संपर्क नहीं होने पर लड़ाकू विमान भी भेजे। विमान कुछ समय ऊपर उठा, फिर दोबारा नीचे गया। आखिरकार हालात कुछ संभले और विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया।
विमान में मौजूद यात्रियों के मुताबिक, कॉकपिट से चीखने और संघर्ष की आवाजें आ रही थीं। कुछ यात्रियों को जब स्थिति की गंभीरता समझ आई तो वे कॉकपिट की तरफ बढ़े। इसी दौरान घायल कैप्टन स्मित बाहर दिखाई दिए। उनके शरीर से खून बह रहा था। विमान में मौजूद इजराइली डेंटिस्ट डॉ. शोटा मूसायेव ने उनकी हालत संभालने में मदद की। उन्होंने बताया कि कैप्टन के सिर और हाथों पर गंभीर चोटें थीं और काफी खून बह चुका था।
खून से लथपथ कैप्टन ने खोला कॉकपिट का दरवाजा
सबसे निर्णायक क्षण इसके बाद आया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित होश में थे। उन्होंने कॉकपिट के दरवाजे का रिलीज बटन दबाया और दरवाजा खोल दिया। इजराइली प्रधानमंत्री के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन के मुताबिक, कैप्टन ने अपनी बची हुई ताकत के आखिरी पलों में यह कदम उठाया। दरवाजा खुलते ही यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्य कॉकपिट में पहुंचे और हमलावर को काबू करने की कोशिश शुरू की।
तीन इजराइली यात्रियों ने हमलावर को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने उसे कॉकपिट से हटाया और बांधकर काबू में रखा। इस दौरान करीब 20 से 25 मिनट तक जद्दोजहद चलने की बात यात्रियों ने बताई है। हमलावर को काबू करने के बाद दो ऑफ-ड्यूटी पायलट, जो यात्री के तौर पर विमान में मौजूद थे, कॉकपिट में पहुंचे। उन्होंने विमान की कमान संभाली और सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई।
विमान के तबूक में उतरने के बाद सभी यात्री सुरक्षित पाए गए। बाद में यात्रियों को दूसरे विमान से तेल अवीव पहुंचाया गया। फ्लाईदुबई ने भी पुष्टि की कि विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं और घटना की जांच शुरू कर दी गई है।
टेक्सटाइल इंजीनियरिंग पढ़े, फिर बने पायलट
कैप्टन स्मित मच्छार का विमानन करियर भी कम दिलचस्प नहीं है। मुंबई से ताल्लुक रखने वाले स्मित ने शुरुआत में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। परिवार का कारोबार टेक्सटाइल से जुड़ा था और उनका भी पारिवारिक कारोबार में जाने का रास्ता तय माना जा रहा था। लेकिन 19 साल की उम्र में एक एविएशन सेमिनार में जाने के बाद उनकी दिलचस्पी विमानन में बढ़ गई। इसके बाद उन्होंने पायलट बनने का फैसला किया।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत स्पाइसजेट से की और करीब 11 साल वहां काम किया। इसके बाद 2022 में फ्लाईदुबई से जुड़े। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उनके पास हजारों घंटे का उड़ान अनुभव है। फिलहाल घायल कैप्टन स्मित का सऊदी अरब के तबूक में इलाज चल रहा है। भारतीय दूतावास के मुताबिक उनकी हालत स्थिर बताई गई है और अधिकारी उनके परिवार के संपर्क में हैं।
कैप्टन स्मित की सूझबूझ की इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से तारीफ की। नेतन्याहू ने कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने संघर्ष किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और यात्रियों व क्रू को हमलावर पर काबू पाने का मौका दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस घटना पर बात करते हुए पायलट की बहादुरी की सराहना की।
इस घटना में विमान में मौजूद यात्रियों, क्रू और ऑफ-ड्यूटी पायलटों की भूमिका भी अहम रही। लेकिन जिस क्षण ने पूरी स्थिति की दिशा बदल दी, वह था गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित का कॉकपिट का दरवाजा खोलना। जमीन से हजारों फीट ऊपर, खून से लथपथ हालत में लिया गया यह फैसला 174 लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने की कहानी का सबसे अहम हिस्सा बन गया। घटना की पूरी परिस्थितियों और हमले के मकसद की जांच अभी जारी है।



