अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ और साहिबगंज जिले के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों में रेलवे रैक पर पत्थर लोडिंग पूरी तरह ठप है। 16 जनवरी से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल ने व्यापारियों और मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर दी है। स्थानीय व्यवसायी रामबिहारी साहू बताते हैं, “हमारे पास स्टॉक पड़ा है, लेकिन रेलवे रैक बंद होने की वजह से बेचने तक नहीं जा पा रहे। हर दिन नुकसान बढ़ रहा है।”
JMM का समर्थन और चेतावनी
हड़ताल में अब झारखंड मुक्ति मोर्चा का भी समर्थन मिल गया है। लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने चेतावनी दी है कि अगर रेलवे अधिकारियों ने स्थानीय मांगों को नजरअंदाज किया, तो 24 जनवरी से अमड़ापाड़ा प्रखंड से कोयला ढुलाई भी अनिश्चितकालीन रूप से बंद कर दी जाएगी। केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा कहते हैं, “पाकुड़ और साहिबगंज राज्य को करोड़ों का राजस्व देते हैं, लेकिन यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही। यह मनमानी अब नहीं चलेगी।”
व्यापारियों और मजदूरों की परेशानी
हड़ताल का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। मजदूर भी प्रभावित हैं। श्यामलाल कुर्मी, जो दैनिक मजदूरी करते हैं, कहते हैं, “रेलवे रैक बंद होने से काम कम हो गया है। हमें रोज की मजदूरी नहीं मिल रही, परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।” इस आंदोलन में क्वारी ओनर एसोसिएशन, चैंबर ऑफ कॉमर्स और मजदूर संगठनों ने भी समर्थन दिया है।
सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव का असर
स्थानीय जनता भी इस आंदोलन में शामिल हो रही है। लोगों का कहना है कि वर्षों से रेलवे की उपेक्षा से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। अब राजनीतिक समर्थन मिलने के बाद यह हड़ताल बड़े जन आंदोलन का रूप ले रही है।
भविष्य पर असर
कुछ जानकारों का कहना है कि अगर 24 जनवरी से कोयला ढुलाई बंद होती है, तो इसका असर सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहेगा। पंजाब और पश्चिम बंगाल के कई पावर प्लांट पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अब सवाल यह है कि रेलवे प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा या आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
इसे भी पढ़ें : विकास की आवाज उठी तो हुआ ‘तांडव’, भाला-तीर और मारधाड़ से सब तहस-नहस



