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Ranchi : झारखंड के गांवों में अक्सर एक जैसी तस्वीर दिखती है। घर की जिम्मेदारी संभालती महिलाएं, छोटे-छोटे कामों से परिवार चलाने की कोशिश करती हुई। कई महिलाएं अपने हुनर के दम पर कुछ करना चाहती हैं, लेकिन बाजार की समझ और सही मार्गदर्शन के अभाव में उनका सपना अधूरा रह जाता है। अब यही कहानी बदलने की तैयारी है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने साफ कहा है कि अब महिलाओं को सिर्फ आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। लक्ष्य है कि गांव की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ से आगे बढ़कर ‘करोड़पति दीदी’ बनें।
एक प्रेजेंटेशन, जिसने उम्मीद जगा दी
झारखंड मंत्रालय में जब IIM कोलकाता की टीम ने महिला उद्यमिता पर प्रेजेंटेशन दिया, तो यह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी। यह उन हजारों महिलाओं के सपनों को दिशा देने की कोशिश थी, जो अपने दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि कैसे नई तकनीक, बाजार की समझ और सही ट्रेनिंग से महिलाओं के छोटे कारोबार को बड़े स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
घर की रसोई से कारोबार तक का सफर
झारखंड की कई महिलाएं पहले से ही पापड़, अचार, बुनाई, हस्तशिल्प जैसे काम कर रही हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी चुनौती है अपने उत्पाद को सही बाजार तक पहुंचाना। मंत्री ने इस बात को समझते हुए कहा कि अब जरूरत है कि महिलाओं को बाजार के हिसाब से तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि मेहनत तो महिलाएं पहले से कर रही हैं, अब उन्हें सही दिशा और तकनीक देना सरकार की जिम्मेदारी है।
JSLPS और IIM की साझेदारी बनेगी सहारा
इसी सोच के साथ JSLPS और IIM कोलकाता के बीच समझौता हुआ है। यह साझेदारी सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को शुरू से लेकर बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करेगी। अगले तीन साल में राज्य के 24 जिलों और 264 प्रखंडों में महिलाओं को व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग दी जाएगी।
सीखने का तरीका भी बदलेगा
इस योजना की खास बात यह है कि ट्रेनिंग का तरीका भी बिल्कुल नया होगा।
- वीडियो के जरिए सीखना
- हिंदी और अंग्रेजी दोनों में सामग्री
- ऑडियो मैसेज के जरिए सवाल पूछने की सुविधा
इससे गांव की महिलाएं बिना किसी झिझक के आसानी से सीख सकेंगी।
हजारों नहीं, लाखों तक पहुंचेगा असर
योजना का लक्ष्य सिर्फ कुछ महिलाओं तक सीमित नहीं है। करीब 50 हजार महिलाओं को सीधे ट्रेनिंग दी जाएगी, जबकि JSLPS से जुड़ी 1 लाख 24 हजार महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचाने की तैयारी है। अगर यह योजना जमीन पर सही तरीके से उतरी, तो इसका असर पूरे राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखेगा।
‘करोड़पति दीदी’ का सपना अब दूर नहीं
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का कहना है कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है। उन्होंने साफ कहा कि अब महिलाओं को छोटे दायरे में नहीं सोचना है, बल्कि बड़े स्तर पर कारोबार करने के लिए तैयार होना है।
बैठक में अधिकारी भी रहे मौजूद
इस मौके पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव मनोज कुमार, IIM कोलकाता के सीईओ डॉ विवेक कुमार राय, गौरव कपूर, JSLPS के COO विष्णु परिदा और नीतीश सिन्हा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
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