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Ranchi : साल 2021 में झारखंड के पश्चिम सिंहभूम के लांजी जंगल में हुए IED धमाके की गूंज तीन साल बाद फिर सुनाई दी… इस बार करीब दो हजार किलोमीटर दूर केरल के मुन्नार की वादियों में। NIA की टीम ने यहां से भाकपा (माओवादी) संगठन के सक्रिय सहयोगी सावन टुटी उर्फ सबन टुटी को गिरफ्तार किया है। यह वही नाम है, जो लांजी जंगल में हुए रक्तरंजित विस्फोट के पीछे साजिश रचने वालों में शामिल था। तीन साल से फरार सावन टुटी पहाड़ों के बीच चाय बागानों में मजदूर बनकर छिपा हुआ था। लेकिन NIA की पैनी नजर और स्थानीय पुलिस की मदद से वह आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया।
तीन जवानों की शहादत से हिल गया था झारखंड
मार्च 2021 की वह दोपहर झारखंड पुलिस के लिए काले दिन की तरह आई थी। लांजी जंगल हिल एरिया में पेट्रोलिंग के दौरान एक जबरदस्त आईईडी ब्लास्ट हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास की ज़मीन हिल गई थी। इस विस्फोट में झारखंड जगुआर के तीन जवान मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि तीन अन्य सुरक्षाकर्मी, जिनमें सीआरपीएफ के एक एएसआई/आरओ भी शामिल थे, गंभीर रूप से घायल हुए। उस समय यह माना गया था कि यह हमला भाकपा (माओवादी) की एक सुनियोजित साजिश थी, जिसे इलाके के स्थानीय संपर्क सूत्रों और सहयोगियों की मदद से अंजाम दिया गया था।
NIA के रडार पर आया सावन टुटी
धमाके की जांच जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई, तो कई महीनों की गुप्त जांच में सावन टुटी का नाम सामने आया।
वह संगठन का एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) था… यानी ऐसा व्यक्ति जो हथियार नहीं उठाता, लेकिन सूचना, रसद और छिपने की जगह जैसी सुविधाएं माओवादियों को उपलब्ध कराता है। एनआईए ने सितंबर 2021 में दाखिल चार्जशीट में सावन टुटी को आरोपी बनाया। उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम (CLA Act) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। फिर उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ और 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।
केरल की वादियों में छिपा था माओवादी नेटवर्क का साथी
फरारी के दौरान सावन टुटी झारखंड से निकलकर पहले ओडिशा गया, फिर धीरे-धीरे दक्षिण भारत के पहाड़ी इलाकों में पहुंच गया।
आख़िरकार उसने केरल के इडुक्की जिले के मुन्नार इलाके को ठिकाना बना लिया। वह यहां चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों के बीच रह रहा था। नकली नाम और बदली हुई पहचान ने उसे अब तक बचाए रखा था। लेकिन एनआईए की नज़रें उस पर टिकी थीं। सूचना मिली, पीछा शुरू हुआ, और सोमवार को एनआईए की टीम ने केरल पुलिस के सहयोग से उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान एजेंसी को मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और पहचान से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं।
एनआईए की कार्रवाई से माओवादी नेटवर्क को झटका
एनआईए के अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क पर प्रहार है। सावन टुटी की गिरफ्तारी से कई और माओवादी संपर्क सूत्रों के नाम सामने आने की उम्मीद है। जांच एजेंसी के मुताबिक, लांजी ब्लास्ट की साजिश माओवादी संगठन के शीर्ष नेताओं ने रची थी, जिसमें स्थानीय सहयोगियों की अहम भूमिका थी।
अभी बाकी हैं कई कड़ियां
एनआईए ने साफ किया है कि जांच अब भी जारी है। कई अन्य आरोपी और साजिशकर्ता अब भी फरार हैं। एजेंसी लगातार झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और दक्षिण भारत के इलाकों में समन्वित अभियान चला रही है ताकि पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके।
तीन साल बाद मिला जवाब
तीन साल पहले जो धमाका तीन जवानों की जान लेकर गया था, उसी केस में अब कानून ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है।
लांजी के जंगलों से लेकर केरल की वादियों तक, एनआईए की यह कार्रवाई साबित करती है कि फरारी चाहे जितनी लंबी क्यों न हो, इंसाफ देर-सवेर पहुंच ही जाता है।
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