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Ranchi (Bero) : राजधानी रांची से सटे बेड़ो के पुरियो पंचायत भवन में शुक्रवार की सुबह कुछ अलग थी। आमतौर पर सरकारी बैठकों के लिए इस्तेमाल होने वाला यह भवन आज बच्चों के भविष्य पर हो रही बातचीत का गवाह बना। बात कानून की थी, लेकिन लहजा डराने वाला नहीं, समझाने वाला था। मकसद सजा बताना नहीं, बल्कि बचपन बचाना था। झालसा के न्यायामूर्ति सह कार्यपालक अध्यक्ष सुजित नारायण प्रसाद के निर्देश पर और न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में गांव के लोग, पाहन, महिलाएं और पीएलवी एक साथ बैठे। चर्चा का विषय था बाल विवाह, एक ऐसी सच्चाई जो आज भी कई घरों में परंपरा के नाम पर चुपचाप दोहराई जाती है।
“कानून किताबों में नहीं, गांव तक पहुंचना चाहिए”
पीएलवी सधनी देवी ने बेहद सहज भाषा में बात रखी। उन्होंने कहा कि बाल विवाह सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि अपराध है। कानून साफ है। लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल से कम होने पर शादी कराना दंडनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार लोग जानकारी के अभाव में गलती कर बैठते हैं, लेकिन कानून अज्ञानता को बहाना नहीं मानता। उनकी बात सुनते हुए कई महिलाएं चुप थीं। शायद उन्हें अपने आसपास की कोई घटना याद आ रही थी।
जब शक हो, तब भी चुप न रहें
पीएलवी दिनेश प्रमाणिक ने बताया कि अगर कहीं बाल विवाह होने की आशंका भी हो, तो अदालत को उसे रोकने का अधिकार है। बच्चे की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर संरक्षण गृह तक का आदेश दिया जा सकता है। उन्होंने साफ कहा कि बाल विवाह की सूचना देना चुगली नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। चाइल्डलाइन 1098, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या नजदीकी थाना, कहीं भी जानकारी दी जा सकती है। टॉल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी लोगों को दी गई।
गांव की आवाज भी रही मौजूद
कार्यक्रम में गांव के पाहन पंचम उरांव भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि समाज तभी बदलेगा जब लोग खुद आगे आएंगे। कानून अपनी जगह है, लेकिन जागरूकता उससे भी जरूरी है। इस मौके पर 14 मार्च को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि इसमें छोटे-बड़े कई मामलों का आपसी समझौते से निपटारा किया जाएगा। यह उन लोगों के लिए मौका है जो सालों से केस के बोझ तले दबे हैं।
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