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Godda : गोड्डा का ऐतिहासिक गांधी मैदान रविवार को कुछ अलग ही अंदाज में नजर आया। सुबह से ही मैदान के आसपास हलचल बढ़ गई थी। कहीं मंच सज रहा था, कहीं साउंड सिस्टम की आखिरी जांच चल रही थी और कहीं रंग-बिरंगी सजावट लोगों का ध्यान खींच रही थी। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, वैसे-वैसे भीड़ भी बढ़ती गई। बच्चों के चेहरे पर उत्सुकता थी और बुजुर्गों के चेहरे पर पुराने मेलों की यादें तैर रही थीं। यही माहौल बना चतुर्थ राजकीय गणतंत्र मेला महोत्सव 2026 का, जिसका उद्घाटन राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विधिवत रूप से किया। यह आयोजन 29 और 30 मार्च 2026 तक चलेगा, लेकिन पहले दिन की शुरुआत ने ही साफ कर दिया कि इस बार गोड्डा में दो दिन तक सिर्फ कार्यक्रम नहीं होंगे, बल्कि संस्कृति का असली उत्सव देखने को मिलेगा।
गांधी मैदान फिर बना शहर की धड़कन
गोड्डा में गांधी मैदान का नाम सुनते ही लोगों को बड़ी सभाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और त्योहारों की याद आती है। लेकिन इस बार गांधी मैदान का माहौल कुछ ज्यादा ही खास था। मैदान में कदम रखते ही मंच की चमक, रोशनी की सजावट और कार्यक्रमों की तैयारी देखकर लोग ठहरकर देखने लगे। छोटे दुकानदार, स्थानीय कलाकार, बाहर से आए मेहमान और दूर-दराज गांव से पहुंचे दर्शक, सब मिलकर एक अलग ही तस्वीर बना रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे गोड्डा के दिल में फिर से मेले की जान लौट आई हो।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा, यह सिर्फ मेला नहीं…
उद्घाटन समारोह के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दो दिवसीय महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का रास्ता बनते हैं। मंत्री ने मंच से यह भी कहा कि झारखंड की पहचान उसके लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक कला और यहां की सामुदायिक एकता में छिपी है, और यह महोत्सव उसी पहचान को आगे बढ़ाने का एक मजबूत प्रयास है।

कार्यक्रम शुरू होते ही गूंज उठा मैदान
जैसे ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई, मैदान में मौजूद लोगों की नजरें मंच पर टिक गईं। पारंपरिक लोकनृत्य, ढोल-मांदर की धुन और लोकगीतों की मिठास ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। कई कलाकारों ने पारंपरिक परिधान पहनकर प्रस्तुति दी। उनके कदमों की ताल और संगीत की लय देखकर दर्शक खुद को तालियां बजाने से रोक नहीं पाए। बच्चे मंच के सामने खड़े होकर नाच देखने लगे, तो वहीं कई लोग मोबाइल कैमरे से वीडियो बनाने में जुट गए।
गोड्डा की गलियों से लेकर गांवों तक दिखा उत्साह
इस महोत्सव को लेकर सिर्फ शहर ही नहीं, गांवों में भी काफी चर्चा रही। कई ग्रामीण परिवार पूरे समूह में गांधी मैदान पहुंचे। कोई अपने बच्चों को पहली बार ऐसा कार्यक्रम दिखाने लाया था, तो कोई अपने इलाके के कलाकार को मंच पर देखने आया था। भीड़ में कई लोग कह रहे थे कि पहले गोड्डा में ऐसे बड़े आयोजन कम होते थे, लेकिन अब माहौल बदल रहा है।

लोककला को मिला मंच, कलाकारों के चेहरे पर खुशी
महोत्सव में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी सबसे खास नजर आई। ऐसे कलाकार, जिन्हें आमतौर पर शादी-ब्याह या छोटे आयोजनों तक सीमित रहना पड़ता था, उन्हें इस मंच पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिला। कई कलाकारों ने बताया कि जब उन्हें इस राजकीय मंच पर प्रस्तुति देने का मौका मिला तो उन्हें अपने गांव और संस्कृति पर गर्व महसूस हुआ। यही वजह रही कि हर प्रस्तुति में मेहनत और उत्साह साफ झलक रहा था।
बाहर से आए कलाकार भी बढ़ाएंगे महोत्सव की रौनक
आयोजन की खास बात यह है कि इस बार देश के विभिन्न हिस्सों से ख्यातिप्राप्त सेलिब्रिटी, गायक, कवि और नर्तक भी इस मंच पर प्रस्तुति देने पहुंच रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक आने वाले दिन में कार्यक्रम और भी ज्यादा आकर्षक होंगे। यही कारण है कि शहरवासियों में पहले दिन के बाद उत्सुकता और ज्यादा बढ़ गई है। लोग अभी से पूछने लगे हैं कि अगले दिन कौन कलाकार आ रहा है, कौन गायक प्रस्तुति देगा और कार्यक्रम कितने बजे शुरू होगा।

मेला सिर्फ मनोरंजन नहीं, रोजगार और पहचान भी
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने संबोधन में साफ कहा कि यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन का मंच नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के महोत्सव स्थानीय कलाकारों, युवाओं और कारीगरों को आगे बढ़ाने का अवसर देते हैं। साथ ही इससे छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापार को भी फायदा होता है। मैदान में लगे स्टॉल और दुकानों पर लोगों की भीड़ देखकर यह बात साफ दिख रही थी। कई दुकानदारों ने बताया कि मेले के पहले ही दिन अच्छी बिक्री हुई और अगर इसी तरह भीड़ रही तो उनका व्यापार काफी बढ़ जाएगा।
दर्शकों के चेहरे पर खुशी, हर कोई चाहता है यह मेला हर साल हो
कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी लोग जल्दी मैदान छोड़ना नहीं चाह रहे थे। कहीं लोग परिवार के साथ घूम रहे थे, तो कहीं युवा ग्रुप फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे। कुछ बुजुर्ग कहते दिखे कि पहले के समय में मेला गांव और शहर की सबसे बड़ी पहचान हुआ करता था, और अब उसी परंपरा को फिर से जिंदा होते देखना अच्छा लग रहा है।

प्रशासन भी रहा अलर्ट, व्यवस्था दिखी मजबूत
महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, इसलिए प्रशासन की ओर से भी व्यवस्था को लेकर खास तैयारी की गई थी। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहे और भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिस प्रशासन की मौजूदगी बनी रही। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे।
मंत्री ने की अपील, सभी लोग बढ़-चढ़कर भाग लें
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गोड्डा का यह महोत्सव पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिक इसमें बढ़-चढ़कर भाग लें और इसे ऐतिहासिक सफलता बनाएं।
गोड्डा के लिए यह दो दिन खास
गोड्डा के गांधी मैदान में शुरू हुआ यह राजकीय गणतंत्र मेला महोत्सव अब सिर्फ एक आयोजन नहीं रह गया है। यह शहर की पहचान, लोगों की खुशी और झारखंड की संस्कृति का जीवंत उदाहरण बन चुका है। अब सभी की नजरें दूसरे दिन के कार्यक्रमों पर टिकी हैं, जहां और भी बड़े कलाकारों की प्रस्तुति से गांधी मैदान फिर से तालियों और संगीत से गूंजने वाला है।
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