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Jamshedpur : जमशेदपुर के बोड़ाम पंचायत के माधवपुर गांव में गुरुवार का दिन सिर्फ पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी का उत्सव था, जो झारखंड की ग्रामीण महिलाओं ने अपनी मेहनत से लिखी है। मिट्टी से जुड़ी इन महिलाओं ने पेड़ को सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का जरिया बना दिया है। ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह जब RPG Group और IMPCA द्वारा आयोजित पौधारोपण आधारित सतत आजीविका कार्यक्रम में पहुंचीं, तो मंच पर आंकड़ों की चर्चा जरूर हुई, लेकिन असली कहानी उन हाथों की थी, जिन्होंने खेतों की मेड़ से लेकर बगीचों तक जीवन रोपा है।
मंत्री ने कहा कि आमतौर पर एक व्यक्ति एक पेड़ लगाने की बात होती है, लेकिन झारखंड की महिलाओं ने ढाई करोड़ से अधिक पौधे लगाकर एक मिसाल कायम की है। यह संख्या सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उस सामूहिक संकल्प की पहचान है, जिसमें महिलाओं ने अपने हिस्से के साथ परिवार के पुरुषों के हिस्से का भी पेड़ लगाकर राज्य की आबादी के बराबर पौधारोपण का लक्ष्य पूरा किया।

आम के बागानों से विदेश तक
माधवपुर और आसपास के गांवों में आज आम के बागान सिर्फ छांव देने के लिए नहीं हैं। ये आय का स्थायी स्रोत बन चुके हैं। कभी जो आम घर की खपत तक सीमित था, वही अब पैक होकर दूसरे राज्यों और विदेशों तक जा रहा है। स्थानीय महिलाओं ने समझदारी से आम, बांस, आंवला और अन्य फलदार व औषधीय पौधों का चयन किया। घर बनाने में काम आने वाली लकड़ी से लेकर पोषण देने वाले फलों तक, हर पौधा सोच-समझकर लगाया गया। इससे परिवार की जरूरतें भी पूरी हो रही हैं और अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।

पेड़, पानी और भविष्य
मंत्री ने साफ कहा कि जहां पेड़ हैं, वहीं पानी है और बेहतर स्वास्थ्य की गारंटी भी। जल, जंगल और जमीन को बचाए बिना झारखंड की पहचान अधूरी है। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य निर्माण का संघर्ष भी इसी संकल्प से जुड़ा था और अब उस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की है। उन्होंने यह भी बताया कि आज पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर भी बन चुका है। बड़े उद्योगों को कार्बन क्रेडिट की जरूरत होती है और गांवों में लगाए गए ये पौधे भविष्य में अतिरिक्त आय का जरिया बन सकते हैं। इसका लाभ सीधे महिलाओं के खातों में पहुंचेगा।

सरकार की योजनाएं और भरोसा
मंत्री ने ग्रामीण महिलाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी आय बढ़ाने और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंईयां सम्मान योजना के तहत हर महीने ₹2500 की राशि सीधे महिलाओं के खातों में भेजी जा रही है, ताकि बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो सकें। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और संगठित होकर आगे बढ़ें। स्वयं सहायता समूहों को सहकारी मॉडल में बदलने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म, बैग और स्टेशनरी जैसी सरकारी जरूरतों का उत्पादन भी समूहों के जरिए हो सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और पैसा गांव में ही घूमेगा।
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