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Ramgarh : सुबह का वक्त था। पतरातू एसडीपीओ दफ्तरप में रोज की तरह कामकाज शुरू ही हुआ था कि अचानक खबर आई – हजारीबाग रेंज के DIG अंजनी कुमार झा पहुंच रहे हैं। कुछ ही देर में दफ्तर का माहौल बदल गया। फाइलें दुरुस्त होने लगीं, रजिस्टर सजाए गए, और परिसर की हलचल बढ़ गई। रामगढ़ के पुलिस कप्तान अजय कुमार ने गुलदस्ता देकर डीआईजी का स्वागत किया। पुलिस केंद्र रामगढ़ की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। औपचारिकताओं के बाद DIG सीधे काम पर उतर गए। उनके चेहरे पर सख्ती थी, लेकिन बातचीत में साफ था कि उनका मकसद सिर्फ कमियां ढूंढना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर करना है।

“दफ्तर की हालत से ही दिखता है सिस्टम”
सबसे पहले उन्होंने कार्यालय परिसर, भवन की साफ-सफाई और किट परेड का निरीक्षण किया। उन्होंने हल्के लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस की छवि सिर्फ बड़े अभियानों से नहीं बनती, बल्कि रोजमर्रा की अनुशासन और व्यवस्था से बनती है। उन्होंने जवानों से भी बातचीत की। पूछा कि ड्यूटी में क्या चुनौतियां हैं, संसाधनों की स्थिति कैसी है। जवानों ने भी खुलकर अपनी बातें रखीं। यह निरीक्षण सिर्फ फाइलों का नहीं, बल्कि मनोबल का भी था।

फाइलों में दर्ज अपराध, जमीन पर असर
इसके बाद शुरू हुई रजिस्टरों की लंबी पड़ताल। अपराध अनुक्रमणी, अपराध मानचित्र, लंबित कांडों की सूची, गुण्डा और गैंग पंजी, लूट-डकैती पंजी से लेकर नक्सल पंजी तक हर दस्तावेज देखा गया। DIG ने पूछा, “यह केस अभी तक लंबित क्यों है?” किसी मामले में जांच की रफ्तार पर सवाल उठे तो कहीं अभियुक्तों की गिरफ्तारी में देरी पर चिंता जताई गई। उन्होंने साफ कहा कि लंबित मामलों का बोझ सिर्फ आंकड़ा नहीं होता, वह पीड़ित परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा होता है। हर फाइल के पीछे एक कहानी होती है, और पुलिस की जिम्मेदारी है कि उसे मुकाम तक पहुंचाए।
संगठित अपराध पर सीधा वार
पिछले छह महीनों में हत्या, आगजनी, गोलीबारी, पोस्टरबाजी और धमकी भरे कॉल जैसी घटनाओं की अलग से समीक्षा की गई। बैठक में अनुसंधानकर्ता, थाना प्रभारी, पुलिस निरीक्षक और पर्यवेक्षी अधिकारी मौजूद थे। DIG ने कहा कि संगठित गिरोहों का मकसद सिर्फ अपराध करना नहीं, बल्कि इलाके में डर का माहौल बनाना होता है। अगर समय रहते सख्ती नहीं हुई तो इसका असर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। उनका जोर इस बात पर था कि खुफिया तंत्र मजबूत हो, और गिरोहों की जड़ तक पहुंचकर कार्रवाई हो।

सौंदा बस्ती की रात, अब पुलिस की कसौटी
11 फरवरी की रात पतरातू थाना क्षेत्र के सौंदा बस्ती सरैया टोला में दो कोयला कारोबारियों के घर अज्ञात अपराधियों ने फायरिंग की थी। उस रात गोलियों की आवाज से पूरा इलाका सहम गया था। बच्चे रोने लगे, घरों के दरवाजे बंद हो गए, और लोगों की नींद उड़ गई। डीआईजी ने इस घटना की गंभीर समीक्षा की। उन्होंने अपराधियों की पहचान और सत्यापन जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही एसपी अजय कुमार को एसटीएफ गठित कर कार्रवाई तेज करने को कहा। उन्होंने कहा, “डर का माहौल खत्म करना हमारी पहली जिम्मेदारी है। लोगों को लगे कि पुलिस उनके साथ खड़ी है।”
शांति सिर्फ कानून से नहीं, भरोसे से आती है
निरीक्षण के अंत में डीआईजी ने तमाम थानेदारों और ओपी प्रभारियों को साफ संदेश दिया कि संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाए।
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