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Ranchi/Bangluru : जब बेंगलुरु से खबर आई कि भारतीय नौसेना के कमांडर आयुष रंजन (39 वर्ष) अब इस दुनिया में नहीं रहे, तो सिर्फ उनके माता-पिता ही नहीं, बल्कि पूरा समाज स्तब्ध रह गया। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे आयुष आखिरकार ज़िंदगी की जंग हार गए। नौसेना के नेतृत्व में बेंगलुरु में ही उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
रिटायर्ड डीएसपी राय मनोरंजन प्रसाद के इकलौते बेटे थे आयुष
आयुष झारखंड की राजधानी रांची में बसे रिटायर्ड डीएसपी राय मनोरंजन प्रसाद और मीना राय के इकलौते बेटे थे। एकलौते बेटे की विदाई ने मां-पिता को असहनीय पीड़ा दी है। लोग कहते हैं कि बेटा भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उनकी यादें, उनकी मुस्कान और उनका जज़्बा हमेशा परिवार व समाज के दिलों में जीवित रहेंगे।
जमशेदपुर से की थी स्कूल की पढ़ाई
मूल रूप से बिहार भरथुआ-कल्याणपुर के रहने वाले आयुष की पढ़ाई लोयोला स्कूल, जमशेदपुर से हुई थी। बचपन से ही वे मेधावी और अनुशासित रहे। दोस्तों को हंसाना, जरूरतमंदों की मदद करना और कठिन हालात में भी सकारात्मक रहना उनकी खासियत थी। इन्हीं गुणों ने उन्हें भारतीय नौसेना तक पहुंचाया। देश की सेवा को उन्होंने अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
आयुष का जाना पूरे समाज और देश के लिए कमी : अजय राय
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने भावुक होकर कहा- “आयुष का जाना सिर्फ एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और देश के लिए कमी है। इतने युवा और ऊर्जावान अधिकारी का अचानक यूं चले जाना दिल तोड़ देने वाला है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि परिवार को इस गहरे दुख को सहने की शक्ति मिले।”
उनकी विदाई के साथ ही नौसेना और समाज एक ऐसे सच्चे सपूत से वंचित हो गए हैं, जिसने अपने छोटे से जीवन में कर्तव्य और सेवा की ऐसी छाप छोड़ी है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। आज हर कोई यही कह रहा है कि कमांडर आयुष रंजन का जीवन भले ही अल्प रहा, लेकिन उनकी स्मृतियां और योगदान अमर रहेंगे।
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