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UP : मुरादाबाद की एक साधारण-सी गृहिणी… मां बनने की खुशी उसके चेहरे पर थी, लेकिन किसे पता था कि यह खुशी कुछ ही दिनों में डर और दर्द में बदल जाएगी। नवजात की किलकारियां घर में गूंज रही थीं। लेकिन उसी रोने की आवाज़ ने मां के दिल-दिमाग को इस कदर झकझोर दिया कि उसने मासूम को फ्रिज में रख दिया। परिवार ने समय रहते बच्चे को निकाल लिया, वरना वह नन्ही जान हमेशा के लिए खामोश हो जाती। जब परिजनों ने महिला से पूछा—“तुमने ऐसा क्यों किया?” तो उसका हैरान करने वाला जवाब आया… “बच्चा रोए जा रहा था, इसलिए उसे फ्रिज में रख दिया।” यह सुनकर सब सन्न रह गए।
कभी झाड़फूंक, कभी बाबा…
परिवार को समझ नहीं आया कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा है। कभी झाड़फूंक, कभी बाबा… लेकिन नतीजा कुछ नहीं। हर गुजरते दिन के साथ मां की हालत बिगड़ती गई। आखिरकार डॉक्टरों के पास पहुंची तो असली वजह सामने आई…, एक मानसिक बीमारी, जो प्रसव के बाद लगभग 5% महिलाओं को प्रभावित करती है।
क्या बोले डॉक्टर
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कार्तिकेय गुप्ता कहते हैं… “इस बीमारी में महिला को भ्रम और शक होने लगता है। उसे लगता है कि लोग उसके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। यह स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि मां खुद को या अपने बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।” देर से पहचान और अंधविश्वास ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। परिवार अगर शुरुआत में ही डॉक्टर तक पहुंचता तो न मां की जान खतरे में आती, न बच्चे की।
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