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Pakur (Jaydev Kumar) : बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट अवार्ड 2025 का ऐलान होते ही पाकुड़ में गर्व और संतोष की एक साझा भावना दौड़ गई। यह वही पाकुड़ है, जहां दूरदराज के गांवों, जंगलों और पहाड़ी इलाकों में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनाव कर्मी दिन-रात जुटे रहे। पाकुड़ जिले के लिए यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन अनगिनत प्रयासों की पहचान है जो अक्सर पर्दे के पीछे रह जाते हैं।
मतदान केंद्र से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
25 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में जब राष्ट्रपति द्रैपदी मुर्मू जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार को सम्मानित करेंगी, तब मंच पर खड़ा व्यक्ति पूरे जिले का प्रतिनिधि होगा। यह सम्मान उस बूथ लेवल ऑफिसर का भी है, जो बारिश और धूप की परवाह किए बिना मतदाता सूची दुरुस्त करता रहा। यह उस सुपरवाइजर का भी है, जिसने समय पर हर मतदान केंद्र की निगरानी की।
लोकतंत्र को जमीन से मजबूत करने की कहानी
पाकुड़ जिले में चुनाव सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहे। यहां मतदान को लेकर भरोसा पैदा करना सबसे बड़ी चुनौती थी। दुर्गम इलाकों में मतदाताओं तक पहुंचना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना आसान काम नहीं था। लेकिन चुनाव टीम ने इसे जिम्मेदारी नहीं, अपना दायित्व माना।
टीमवर्क बना सफलता की सबसे बड़ी ताकत
बीएलओ से लेकर ईआरओ और एईआरओ तक, हर स्तर पर एक ही सोच थी कि कोई मतदाता छूटे नहीं और कोई वोट दबाव में न पड़े। तकनीक का बेहतर इस्तेमाल हो या मतदाता जागरूकता अभियान, हर पहल में टीमवर्क साफ नजर आया। यही कारण रहा कि राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने पाकुड़ को देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में शामिल किया।
सम्मान नहीं, जिम्मेदारी है यह पुरस्कार
उपायुक्त मनीष कुमार कहते हैं कि यह सम्मान व्यक्तिगत नहीं है। यह उन सभी कर्मियों का है, जिन्होंने ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम किया। उनके शब्दों में यह पुरस्कार एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। यह आगे और बेहतर करने की जिम्मेदारी भी देता है।
पाकुड़ के लिए नई पहचान
यह उपलब्धि पाकुड़ जिले को केवल एक प्रशासनिक पहचान नहीं देती, बल्कि यह भरोसा भी जगाती है कि लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब हर स्तर पर लोग उसे ईमानदारी से निभाते हैं। यह कहानी बताती है कि छोटे जिले भी बड़े उदाहरण बन सकते हैं, बस नीयत और मेहनत सच्ची होनी चाहिए।
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