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Pakur (Jaydev Kumar) : साइबर ठग अब लोगों को ठगने के लिए सरकारी अधिकारियों की पहचान का भी गलत इस्तेमाल करने लगे हैं। पाकुड़ की डीसी मेघा भारद्वाज के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों ने एक फर्जी व्हाट्सएप आईडी बना ली है। इस फर्जी नंबर से जिले के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों को मैसेज भेजकर पैसे और गिफ्ट की मांग की जा रही है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और साफ कहा है कि इस नंबर का उपायुक्त या जिला प्रशासन से कोई संबंध नहीं है।
विदेशी नंबर से भेजे जा रहे मैसेज, प्रशासन ने किया अलर्ट
जिला प्रशासन के अनुसार साइबर ठग +66 616482051 नंबर का इस्तेमाल कर डीसी मेघा भारद्वाज बनकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। कई लोगों को मैसेज भेजकर रुपये और उपहार की मांग की गई है। जैसे ही इसकी जानकारी प्रशासन को मिली, तुरंत लोगों को अलर्ट किया गया। प्रशासन ने कहा कि यह पूरी तरह साइबर ठगी का प्रयास है और किसी भी व्यक्ति को ऐसे मैसेज या कॉल पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उपायुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस व्हाट्सएप नंबर का जिला प्रशासन से कोई लेना-देना नहीं है। यदि कोई व्यक्ति डीसी के नाम पर पैसे मांगता है या किसी तरह का आर्थिक लेनदेन करने के लिए कहता है, तो उसे तुरंत नजरअंदाज करें और इसकी सूचना पुलिस को दें।

पुलिस ने शुरू की जांच, लोगों से नहीं साझा करें निजी जानकारी
मामले की सूचना पाकुड़ एसपी अनुदीप सिंह को दे दी गई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और फर्जी व्हाट्सएप आईडी बनाने वाले साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। डीसी मेघा भारद्वाज ने जिले के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, शुभचिंतकों और आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके नाम पर किसी भी संदिग्ध व्हाट्सएप नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट से संदेश, कॉल या पैसे और उपहार की मांग की जाती है तो उस पर बिल्कुल भरोसा न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या अन्य निजी जानकारी साझा न करें।
संदेह होने पर तुरंत पुलिस को दें सूचना
जिला प्रशासन ने लोगों से कहा है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर आने वाले किसी भी संदिग्ध संदेश की पहले पुष्टि करें। किसी अधिकारी के नाम पर यदि आर्थिक मदद या गिफ्ट की मांग की जाती है, तो बिना जांचे कोई कदम न उठाएं। प्रशासन ने कहा कि थोड़ी सी सतर्कता बड़ी साइबर ठगी से बचा सकती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी थाना या साइबर पुलिस को दें, ताकि समय रहते अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
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