अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के दूरदराज गांवों में सुबह अक्सर जल्दी होती है। कहीं कच्ची सड़कें हैं, कहीं जंगलों के बीच बसे टोले और कहीं ऐसे लोग, जिनकी पहचान लंबे समय तक सिर्फ हाशिये तक सीमित रही। इन्हीं रास्तों से होकर कुछ लोग रोज निकलते थे, हाथ में फाइल, चेहरे पर धूप की तपिश और मन में एक ही जिद कि हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो। आज उसी मेहनत को देश ने पहचाना। 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पाकुड़ जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला, तो यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं था। यह उन अनगिनत कदमों की गूंज थी, जो लोकतंत्र को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए उठाए गए।

जब लोकतंत्र ने सबको साथ लिया
‘प्रोजेक्ट समावेश’ की शुरुआत एक साधारण सोच से हुई थी कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब समाज का कोई भी वर्ग पीछे न रह जाए। ट्रांसजेंडर समुदाय, दिव्यांगजन, पीवीटीजी और पहली बार वोट देने वाले युवा, जिन्हें अक्सर व्यवस्था से दूरी महसूस होती थी, उन्हें मतदान की प्रक्रिया से जोड़ना आसान काम नहीं था। कहीं संकोच था, कहीं अविश्वास और कहीं जानकारी का अभाव। लेकिन लगातार संवाद, घर-घर संपर्क और धैर्य के साथ यह दूरी धीरे-धीरे कम होती गई।
16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पाकुड़ जिले को राष्ट्रीय सम्मान मिला। प्रोजेक्ट समावेश के जरिए ट्रांसजेंडर, दिव्यांग, पीवीटीजी और युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ने की पहल को पूरे देश ने सराहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों नवाजे गये डीसी मनीष pic.twitter.com/eQAkiJCR0g
— News Samvad (@newssamvaad) January 25, 2026
मुश्किल रास्तों पर लोकतंत्र की मशाल
इस पूरी यात्रा के असली नायक वे बूथ लेवल ऑफिसर रहे, जो कभी तेज धूप में पैदल चले, तो कभी दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए निजी साधनों का सहारा लिया। BLO सुपरवाइजर, AERO और ARO ने भी हर स्तर पर यह सुनिश्चित किया कि कोई नाम छूटे नहीं, कोई आवाज अनसुनी न रहे। यह काम सिर्फ फॉर्म भरने का नहीं था। यह भरोसा दिलाने का था कि आपका वोट मायने रखता है।

सम्मान में छुपी हजारों कहानियां
राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान उस सामूहिक प्रयास की मुहर है, जिसमें न किसी ने अपने काम के घंटे गिने और न ही हालात की शिकायत की। हर फाइल के पीछे एक चेहरा था और हर नाम के पीछे एक कहानी।
पाकुड़ की जीत, लोकतंत्र की मजबूती
आज जब पाकुड़ का नाम राष्ट्रीय मंच पर लिया गया, तो यह जिले के लिए गौरव का क्षण बन गया। यह जीत किसी एक व्यक्ति या कार्यालय की नहीं, बल्कि उन कर्मवीरों की है, जिन्होंने लोकतंत्र को सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जमीन पर जीने वाली सच्चाई बनाया।

इसे भी पढ़ें : पाकुड़ में कदमों के साथ उठा संकल्प, मैराथन बनी जागरूकता की दौड़

