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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के गांवों में दूर तक फैली पहाड़ियों और नदी किनारे उठती धूल के बीच एक सवाल बार-बार लौट आता है कि अवैध उत्खनन कब रुकेगा। यह सवाल किसी रिपोर्ट में दर्ज नहीं होता, बल्कि उन परिवारों की थकी आवाज में सुनाई देता है जिनकी जमीन, रास्ते और दिन-रात की शांति इस धंधे की वजह से टूटती है। इसी माहौल के बीच पाकुड़ एसपी निधि द्विवेदी ने मासिक अपराध गोष्ठी में पुलिस अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उन लोगों की सुरक्षा भी है जिन्हें इस अराजकता की कीमत चुकानी पड़ती है।
गांव की चिंता- धूल, आवाज और डर
गिरती दीवारें, टूटते रास्ते और रात में चलने वाले भारी वाहनों की आवाज गांवों को बेचैन कर देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध पत्थर और बालू परिवहन से उनके घरों में धूल भर जाती है और बच्चों के पढ़ाई-लिखाई में भी बाधा आती है। कई परिवार शिकायत तो करना चाहते हैं, पर डर के कारण चुप रहते हैं। एसपी ने इस डर को समझने की बात कही और भरोसा दिलाया कि शिकायत करने वालों का नाम सुरक्षित रहेगा।
गश्त बढ़ाने का फैसला, ताकि लोग चैन से जी सकें
एसपी द्विवेदी ने कहा कि चोरी और छिनतई की घटनाओं पर रोक लगाना सिर्फ आंकड़ों का लक्ष्य नहीं है। यह उन लोगों की सुरक्षा के लिए है जो सुबह काम पर निकलते हैं और चाहते हैं कि शाम को घर लौटते समय उनका रास्ता सुरक्षित हो। इसलिए बैंक, एटीएम और पेट्रोल पंप जैसे जगहों पर पैदल और बाइक गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। एसपी निधि द्विवेदी ने खनन माफियाओं की कमर तोड़ देने की खुली छूट पाकुड़ पुलिस को दे दी है। उन्होंने साफ और सख्त लहजे में कहा कि किसी भी हाल में कोयला-बालू अवैध खनन पर रोक गलनी चाहिये।
कोयला चोरी और छोटी गाड़ियों का इस्तेमाल
कई इलाकों में कोयला चोरी एक जटिल समस्या बन चुकी है। कोयला ढोने के लिए इस्तेमाल होने वाले छोटे वाहन और बाइक न सिर्फ कानून तोड़ते हैं, बल्कि सड़क किनारे छोटे दुकानदारों और राहगीरों के लिए जोखिम भी बन जाते हैं। एसपी ने कहा कि नियमित छापेमारी अभियान से इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। इससे उन मजदूर परिवारों को भी राहत मिलेगी जो रोजमर्रा के डर में जीते हैं कि किसी विवाद में उनका नाम न घसीट दिया जाए।
टास्क फोर्स के साथ संयुक्त कार्रवाई
अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के लिए जिला खनन टास्क फोर्स के साथ संयुक्त छापेमारी की रणनीति बनाई गई है। इसका उद्देश्य सिर्फ वाहनों को पकड़ना नहीं, बल्कि उस चक्र को तोड़ना है जो स्थानीय संसाधनों को खत्म कर रहा है और लोगों के जीवन स्तर को प्रभावित कर रहा है। एसपी ने साफ कहा कि अवैध उत्खनन की गतिविधियां गांवों के पर्यावरण और लोगों के भविष्य, दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए पुलिस की कार्रवाई सिर्फ कानूनी कदम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
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