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Pakur (Jaydev Kumar) : मालदा रेल मंडल के सकरीगली और महाराजपुर के बीच गंगा नदी का पानी रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया है। नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटबंध कट गया, जिसके बाद रेल प्रशासन ने एहतियातन ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है। पटरी को सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मरम्मत का काम चल रहा है। इस रेल ब्लॉक की वजह से बीते 28 सितंबर से ही ट्रेनों के पहिए थमे हैं। शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन भी जब गाड़ियां नहीं चलीं, तो पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर मुसाफिरों की भारी भीड़ जुट गई और लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
रोजाना आने-जाने वालों की जेब ढीली, बस स्टैंड पर भीड़
ट्रेनों के अचानक रद्द होने की सबसे बड़ी मार रोज सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और मजदूरों पर पड़ी है। साहिबगंज से पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट, बोलपुर, वर्धमान और हावड़ा की ओर जाने वाले लोग खासे परेशान हैं। स्टेशन पहुंचे यात्रियों का कहना है कि वे हर सुबह सफर की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन ट्रेनों के न चलने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। कई लोग मजबूरी में बस, ऑटो या निजी गाड़ियों का सहारा ले रहे हैं। इसके चलते मुसाफिरों का समय भी बर्बाद हो रहा है और सामान्य दिनों के मुकाबले जेब पर तीन से चार गुना ज्यादा बोझ पड़ रहा है। यात्रियों के बीच रेलवे की लचर व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी साफ देखने को मिल रही है।
अप और डाउन रूट की कई गाड़ियां ठप, वनांचल का रास्ता बदला
रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस रूट की महत्वपूर्ण ट्रेनों को पूरी तरह बंद रखा है। अप लाइन की बात करें तो रामपुरहाट से गया जाने वाली पैसेंजर, वर्धमान से साहिबगंज पैसेंजर, हावड़ा से साहिबगंज एक्सप्रेस और रामपुरहाट से साहिबगंज पैसेंजर ट्रेन को रद्द किया गया है। वहीं डाउन रूट में साहिबगंज से बर्दवान पैसेंजर, साहिबगंज से रामपुरहाट पैसेंजर और साहिबगंज से हावड़ा इंटरसिटी एक्सप्रेस जैसी नियमित गाड़ियों का फेरा भी रोक दिया गया है। इसके साथ ही लंबी दूरी की भागलपुर से रांची जाने वाली वनांचल एक्सप्रेस को पाकुड़ रूट से हटाकर बदले हुए रास्ते से निकाला जा रहा है, जिससे यात्रियों का सफर काफी लंबा खिंच गया है।
ट्रैक दुरुस्त होते ही फिर शुरू होगा सफर: रेलवे
स्टेशन पर पूछताछ काउंटरों पर दिन भर लोगों का जमावड़ा लगा रहा और यात्री ट्रेनों की बहाली को लेकर सवाल पूछते रहे। मुख्य टिकट निरीक्षक अखिलेश चौबे ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि रेलवे की पहली प्राथमिकता मुसाफिरों की जान-माल की सुरक्षा है। तटबंध कटने के कारण ट्रैक के नीचे की मिट्टी खिसकने का जोखिम बना हुआ है, इसलिए ट्रेनों को रद्द और डायवर्ट करने का कड़ा फैसला लेना पड़ा। रेलवे के इंजीनियर और तकनीकी टीमें युद्धस्तर पर पटरी और उसके आसपास के हिस्से को दुरुस्त करने में जुटी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित घोषित होगा, सभी ट्रेनों का परिचालन सामान्य कर दिया जाएगा।
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