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Muzaffarpur : बिहार चुनावी माहौल के बीच एनडीए के दिग्गज नेता लगातार आरजेडी के शासनकाल को “जंगल राज” बताकर विपक्ष पर तीखे प्रहार कर रहे हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में हुई अपनी चुनावी सभा में आरजेडी शासनकाल के “अपहरण उद्योग” का जिक्र करते हुए बिहार के चर्चित गोलू अपहरण कांड (2001) की याद ताज़ा कर दी। पीएम मोदी ने कहा कि लालू-राबड़ी राज में बच्चों तक को दिनदहाड़े अगवा कर लिया जाता था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में मुजफ्फरपुर के गोलू नामक एक बालक का अपहरण हुआ था, जिसकी बाद में निर्मम हत्या कर दी गई थी।
मुजफ्फरपुर के लोग RJD सरकार में हुआ गोलू अपहरण कांड कभी नहीं भूल सकते।
– प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी pic.twitter.com/ByJx8ZBsM1
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) October 30, 2025
“आज भी आंगन सूना है”
गोलू के पिता रतन सिंह, जो अब सेवानिवृत्त बैंककर्मी हैं, प्रधानमंत्री का भाषण सुनकर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि जैसे ही पीएम मोदी ने उनके बेटे का नाम लिया, उनकी आंखों के सामने 24 साल पुराना दर्द फिर ताज़ा हो गया। रतन सिंह ने रोते हुए कहा कि उस समय सरकार ने कार्रवाई तो शुरू की थी, लेकिन न्याय आज तक नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनके आंगन की चहचहाहट गोलू के जाने के साथ ही खत्म हो गई। इस मामले में न्यायिक जांच आयोग (जस्टिस लोकनाथ आयोग) का गठन भी हुआ था, मगर उसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हुई। रतन सिंह के अनुसार, मुख्य आरोपी महेश चौधरी आज भी फरार है। प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद एक बार फिर से जागी है।
क्या था गोलू अपहरण कांड?
20 सितंबर 2001 को मुजफ्फरपुर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाला पांच वर्षीय गोलू कुमार रोज की तरह स्कूल से घर लौट रहा था। तभी रास्ते में बदमाशों ने उसका दिनदहाड़े अपहरण कर लिया। शहर के बीचोंबीच हुई इस घटना से हड़कंप मच गया। देर शाम तक गोलू का कोई पता नहीं चला तो परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला कि अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की मांग की थी।
फिरौती, साजिश और हत्या
परिवार और पुलिस दोनों गोलू को सकुशल वापस लाने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन कुछ दिनों बाद खबर आई कि गोलू की हत्या कर दी गई है। यह खबर फैलते ही मुजफ्फरपुर से पटना तक गुस्से की लहर दौड़ गई। लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया गया। भीड़ ने सड़कें जाम कर दीं और शहर में बंद का माहौल बन गया।
शहर में भड़की हिंसा, थानों में लगाई गई आग
प्रदर्शन हिंसक हो गया। लोगों ने नगर थाना, नाका थाना और कई पुलिस चौकियों को आग के हवाले कर दिया। हालात इतने बिगड़े कि पुलिसकर्मी अपनी वर्दी में बाहर निकलने से डर रहे थे। पुलिस ने लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की, जिसमें कई लोग घायल हुए।
हेलीकॉप्टर से भेजे गए नए एसपी
स्थिति इतनी विकट हो गई कि राज्य सरकार को पटना से हेलीकॉप्टर के जरिए आईपीएस रविन्द्र कुमार सिंह को मुजफ्फरपुर भेजना पड़ा। तत्कालीन एसपी नय्यर हसनैन खान को वापस बुला लिया गया। शहर में दो दिनों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
पुलिस जांच और मुकदमे की कहानी
इस केस में सात लोगों को नामजद किया गया। कुछ की गिरफ्तारी हुई, जबकि कई आरोपी फरार हो गए। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि अपहरण की साजिश पहले से रची गई थी, जिसमें स्थानीय लोगों की संलिप्तता थी। केस अदालत में गया, पर वर्षों बीतने के साथ गवाह मुकर गए और सबूत कमजोर पड़ते गए। धीरे-धीरे यह मामला फाइलों में दब गया।
23 साल बाद फिर खुला मामला
वर्ष 2024 में पुलिस ने दोबारा इस मामले की फाइल खोली। पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए, गवाहों से संपर्क किया गया और फरार आरोपियों की तलाश तेज की गई। जांच अधिकारी को आरोपितों का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। अब जब प्रधानमंत्री मोदी ने 24 साल बाद गोलू अपहरण कांड का जिक्र किया, तो बिहार में एक बार फिर “अपहरण उद्योग” और उस दौर के “जंगल राज” की चर्चा तेज हो गई है।
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