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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा के भंडरिया प्रखंड कार्यालय की एक सामान्य सी सुबह थी। फाइलें अपनी जगह थीं, कर्मचारी अपने काम में लगे थे, लेकिन एक कुर्सी कई दिनों से खाली पड़ी थी। वही कुर्सी, जिस पर बैठकर पंचायत सचिव को गांवों की समस्याएं सुननी थीं। 27 दिसंबर को जब डीसी दिनेश यादव अचानक कार्यालय पहुंचे, तो इसी खाली कुर्सी ने एक बड़ी कहानी की ओर इशारा कर दिया।
खाली कुर्सी ने खोल दिया राज
औचक निरीक्षण के दौरान पंचायत सचिव परमा राम कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। पहली नजर में यह एक सामान्य अनुपस्थिति लग सकती थी, लेकिन जब रजिस्टर और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड खंगाले गए, तो तस्वीर कुछ और ही निकली। जांच में सामने आया कि परमा राम पिछले आठ दिनों से लगातार ड्यूटी से गायब थे।
गांव में इंतजार, दफ्तर में सन्नाटा
इन आठ दिनों में भंडरिया के कई गांवों में लोग पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। किसी को प्रमाण पत्र चाहिए था, किसी को योजना से जुड़ी जानकारी। सचिव की गैरमौजूदगी में काम रुका रहा और ग्रामीण इंतजार करते रहे। उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि दफ्तर से दूरी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भी बन चुकी है।
गलत जगह से बनती रही हाजिरी
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब यह पता चला कि पंचायत सचिव अपनी पदस्थापना स्थल भंडरिया में आए बिना ही किसी अन्य स्थान से बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कर रहे थे। यानी कागजों में सब ठीक था, लेकिन हकीकत में व्यवस्था से दूरी बनी हुई थी।
जवाब आया, भरोसा नहीं
उपायुक्त ने 29 दिसंबर को सचिव से स्पष्टीकरण मांगा। अगले दिन जवाब भी आया, लेकिन उसमें न तो अनुपस्थिति का ठोस कारण था और न ही गलत हाजिरी पर कोई संतोषजनक सफाई। प्रशासन के लिए यह साफ संकेत था कि मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी का है।
निलंबन और सख्त संदेश
इसके बाद डीसी ने पंचायत सचिव परमा राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रखंड कार्यालय केतार तय किया गया है और नियमों के अनुसार जीवन यापन भत्ता देय होगा। डीसी का साफ कहना है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
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