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Ranchi : राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च निकालने के ऐलान के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। झारखंड भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कांग्रेस सांसद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राहुल गांधी लोकतांत्रिक व्यवस्था से अपना भरोसा खो चुके हैं। वे चुनावी प्रक्रिया के जरिए जनता का दिल जीतने के बजाय अब सड़कों पर अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली की तुलना सीधे नक्सलियों की सोच से कर दी।
गांधी के सिद्धांतों को छोड़कर नक्सली ढर्रे पर चल रही पार्टी
प्रतुल शाह देव ने कहा कि कभी महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर चलने का दावा करने वाली कांग्रेस आज नक्सलियों की विचारधारा से पूरी तरह प्रभावित नजर आ रही है। कांग्रेस ने अब अपना मुखौटा उतार फेंका है। जिस तरह नक्सली संगठन हिंसा और अव्यवस्था फैलाकर अपनी सत्ता कायम करने की कोशिश करते हैं, ठीक वैसा ही रवैया आज राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अपना रही है। कांग्रेस को जनता के फैसले पर भरोसा नहीं रहा, इसलिए वह हर संस्था को चुनौती देने पर आमादा है।
सुप्रीम कोर्ट को सियासी अखाड़ा न बनाएं राहुल गांधी
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करना कोई सामान्य राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत पर सीधा दबाव बनाने का पैंतरा है। जब मामला पहले से ही अदालत के विचाराधीन है, तो सड़कों पर धरना प्रदर्शन करके न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था के फैसले से असहमति हो सकती है, लेकिन फैसले को प्रभावित करने के लिए कोर्ट तक मार्च निकालना पूरी तरह गलत है। राहुल गांधी को यह समझना होगा कि सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, कोई राजनीतिक अखाड़ा नहीं।
हार पचा नहीं पाते, इसलिए संस्थाओं पर उठाते हैं सवाल
प्रतुल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की राजनीति केवल टकराव और संस्थाओं की साख गिराने पर टिकी है। जब चुनाव के नतीजे उनके मनमुताबिक नहीं आते, तो वे चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करने लगते हैं और अब वे न्यायपालिका को भी अपने राजनीतिक विरोध में घसीट रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में सत्ता का रास्ता जनता के वोटों से तय होता है, न कि सड़कों पर बवाल काटकर या संवैधानिक संस्थाओं को धमकाकर। कांग्रेस को यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए कि शोर-शराबा करके जनादेश को बदला जा सकता है। राहुल गांधी को देश के सामने साफ करना चाहिए कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं या नहीं।
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