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Patna : पटना में बुधवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब विशेष निगरानी इकाई यानी SVU की टीम ने ठेकेदार रिशु श्री के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। मीठापुर स्थित उनके आवास समेत अलग-अलग लोकेशन पर पहुंची टीम ने घंटों तक दस्तावेज, बैंक डिटेल, लैपटॉप, मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की। रिशु श्री पर सरकारी टेंडरों में गड़बड़ी करने, अधिकारियों से सांठगांठ कर अपनी कंपनियों को फायदा पहुंचाने और बड़े स्तर पर आर्थिक अनियमितता करने के आरोप हैं। इस कार्रवाई के बाद बिहार के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
विदेश ट्रिप कराने के आरोप ने बढ़ाई मुश्किलें
रिशु श्री का नाम पहली बार तब सुर्खियों में आया था, जब करीब छह महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए रिशु श्री ने दो IAS अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं का पूरा खर्च उठाया था। बताया गया कि 2017 बैच के IAS योगेश कुमार सागर और 2014 बैच की IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा के परिवारों को यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की ट्रिप कराई गई थी। इसमें हवाई यात्रा से लेकर होटल में ठहरने तक का पूरा खर्च रिशु श्री ने उठाया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, IAS अभिलाषा शर्मा के घर की छत पर बनाई गई बागवानी पर करीब 9 लाख रुपये खर्च हुए थे और यह रकम भी रिशु श्री की ओर से मैनेज की गई थी। इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
निगरानी विभाग के पास पहुंचा मामला
विशेष निगरानी इकाई के ADG पंकज दराद ने पहले ही ED की रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि मामला अपर मुख्य सचिव निगरानी के पास भेज दिया गया है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित IAS अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है। अब SVU की ताजा कार्रवाई को उसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि टेंडर प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों और विभागों की भूमिका रही।
पहले भी ED कर चुकी है बड़ी कार्रवाई
रिशु श्री पहले से ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत जांच का सामना कर रहे हैं। 25 नवंबर को ED ने अहमदाबाद, सूरत, गुड़गांव और दिल्ली समेत देशभर में उनके 9 ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान जांच एजेंसी को 33 लाख रुपये नकद, कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस मिले थे। जांच में यह भी सामने आया था कि सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कई विभागों के अधिकारियों को भारी कमीशन दिए गए थे।
दरभंगा के BDO चंद्र मोहन पासवान के यहां भी छापेमारी
इधर आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने दरभंगा के केवटी प्रखंड के BDO चंद्र मोहन पासवान के खिलाफ भी बड़ा एक्शन लिया है। टीम ने बुधवार को उनके छह अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इनमें केवटी प्रखंड मुख्यालय स्थित कार्यालय और सरकारी आवास शामिल हैं। इसके अलावा मधुबनी जिले के बाबूबरही स्थित पैतृक घर, सीतामढ़ी के एक ठिकाने और दरभंगा के बहादुरपुर थाना क्षेत्र स्थित निजी आवास पर भी जांच चल रही है। EOU की टीम संपत्ति, बैंक खातों, जमीन से जुड़े कागजात और आय से अधिक संपत्ति के पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों ने फिलहाल मामले में ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया है, लेकिन माना जा रहा है कि जांच के बाद कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
बिहार में बढ़ी निगरानी एजेंसियों की सक्रियता
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि बिहार में आर्थिक अपराध, टेंडर घोटाले और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर निगरानी एजेंसियां अब ज्यादा आक्रामक नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि इस जांच की आंच अब सिर्फ ठेकेदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि अफसरशाही तक भी पहुंचती दिखाई दे रही है।
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