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Pawan Thakur, Ranchi
राजधानी की शांत सड़कें, शाम का वक्त और पीछे से तेज रफ्तार में आती एक बाइक। पलक झपकते ही गले पर झपट्टा और हवा में गायब होते लुटेरे। रांची के लोग पिछले कई दिनों से इसी खौफ के साए में जी रहे थे। बरियातू से लेकर मेसरा तक, महिलाओं के गले से सोने की चेन झपटकर फरार होने वाला गिरोह शहर की पुलिस की नींद उड़ा चुका था। एसएसपी राकेश रंजन ने जब मामले की कमान संभाली और थानों को अल्टीमेटम दिया, तो पुलिस ने जाल बिछाना शुरू किया। बीते तीन अक्टूबर को जब फिर से दो इलाकों में वही पुरानी कहानी दोहराई गई, तो पुलिस का धैर्य जवाब दे गया। चार अक्टूबर की सुबह तक उस गिरोह के तीन चेहरे पुलिस के शिकंजे में थे, जिसका खौफ सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में फैला हुआ था, यानी कटिहार का बदनाम ‘कोढ़ा गैंग’।
चुट्टू गांव के पास अचानक गूंजी गोलियों की तड़तड़ाहट
थाने में पूछताछ के दरम्यान तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने माना कि रांची की सड़कों पर एक दर्जन से ज्यादा वारदातों को उन लोगों ने ही अंजाम दिया था और लोगों को डराने के लिए हथियारों की नुमाइश भी की थी। इसके बाद कहानी में असली मोड़ आया। बदमाशों ने कहा कि रिंग रोड से सटे चुट्टू गांव के पास उन्होंने हथियार छिपा रखे हैं। पुलिस टीम तीनों को गाड़ी में बैठाकर रिंग रोड की ओर निकल पड़ी। माहौल शांत था, लेकिन बदमाशों के दिमाग में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। जैसे ही टीम चुट्टू गांव के सुनसान इलाके में पहुंची, आकाश यादव उर्फ रंगीला ने अचानक हवलदार रविन्द्र कुमार पर झपट्टा मारा। जब तक कोई कुछ समझ पाता, रंगीला हवलदार की सरकारी पिस्टल छीन चुका था। उसने भागते हुए पुलिस टीम पर सीधे गोली चला दी। गोली की आवाज से पूरा इलाका थर्रा उठा। बरियातू थानेदार इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार रजक ने बिना वक्त गंवाए आत्मरक्षार्थ मोर्चा संभाला और जवाबी फायर कर दिया। गोली सीधे रंगीला के पैर में लगी और वह चीखते हुए जमीन पर गिर पड़ा। बाकी दोनों साथी अमन और कार्तिक भागने की फिराक में थे, लेकिन अलर्ट पुलिसकर्मियों ने दौड़कर उन्हें दबोच लिया।

कटिहार से निकला खौफ का वो नेटवर्क, जिस पर दर्ज हैं 40 से ज्यादा मुकदमे
जमीन पर कराहते रंगीला को तुरंत रिम्स भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान तो बचा ली, लेकिन उसकी अपराध की कुंडली ने पुलिस के होश उड़ा दिये। यह कोई आम झपटमार नहीं था। कटिहार के नयाटोली जुराबगंज से ताल्लुक रखने वाले इस गिरोह का इतिहास खौफनाक रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया कि पकड़े गए तीनों बदमाशों पर बिहार और झारखंड के थानों में 40 से ज्यादा गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। अकेले रंगीला पर नालंदा, लखीसराय, हाजीपुर, सहरसा, पटना के दीघा, दानापुर, बक्सर और रामगढ़ में लूट व आर्म्स एक्ट के मुकदमे लदे हैं। वहीं अमन और कार्तिक भी सुपौल, गया और अन्य जिलों में छिनतई के कई मामलों में वांटेड रहे हैं। रांची के अलावा हजारीबाग, रामगढ़ और धनबाद तक इनकी दहशत फैली हुई थी।
बरामद हुई लूटी गई चेनें और दो तेज रफ्तार बाइक
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर छिपाकर रखा गया एक कट्टा, एक जिंदा गोली और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली दोनों तेज रफ्तार गाड़ियां यानी एक होंडा शाइन और एक पल्सर जब्त कर ली हैं। इसके अलावा महिलाओं से छीनी गई चार पूरी सोने की चेन और एक आधी चेन भी बरामद की गई है। सड़क पर हथियार चमकाकर दहशत फैलाने वाले इस गैंग की कमर टूट चुकी है। घायल रंगीला अस्पताल के बेड पर पुलिस के पहरे में है और उसके दोनों साथी सलाखों के पीछे। पुलिस अब इस बात की पड़ताल में जुटी है कि इन शातिरों को शहर में पनाह कौन देता था और छीने गए जेवरात किस सुनार की तिजोरी तक पहुंचते थे।
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