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Ranchi : राजधानी में अपराध पर लगाम लगाने के लिए रांची पुलिस अब ‘घटना के बाद कार्रवाई’ के ढर्रे को छोड़कर ‘घटना से पहले रोकथाम’ की रणनीति पर काम करेगी। शहर और ग्रामीण इलाकों में सक्रिय गिरोहों, पुराने अपराधियों और आपराधिक राह पकड़ रहे युवाओं की नकेल कसने के लिए रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने सख्त रुख अपनाया है। एसएसपी ने सिटी एसपी पारस राणा, ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी, एएसपी कोतवाली, सभी डीएसपी और थानेदारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर अपराधियों की नए सिरे से प्रोफाइलिंग और मैपिंग करने का निर्देश दिया है। अब शहर के हर थाने में संदिग्धों और बदमाशों का पूरा कच्चा-चिट्ठा डिजिटल और कागजी तौर पर तैयार रहेगा।
पुराने बदमाशों की बनेगी कुंडली, 15 साल का रिकॉर्ड खंगालेंगे थानेदार
एसएसपी ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने इलाके में पिछले 10 से 15 सालों के दौरान जेल जा चुके या सक्रिय रहे अपराधियों की लिस्ट निकालें। भले ही वे अभी शांत दिख रहे हों, लेकिन उनकी मौजूदा कमाई के जरिए और गतिविधियों की पूरी जांच होगी ताकि वे दोबारा कोई नया गैंग न खड़ा कर सकें। इसके अलावा रंगदारी, मर्डर, मारपीट, जमीन पर अवैध कब्जे, नशे का धंधा, जुआ-मटका और शराब माफिया से जुड़े वर्तमान अपराधियों की भी विस्तृत फाइल तैयार की जाएगी। पुलिस लगातार इनके ठिकानों का सत्यापन करेगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना से पहले ही इनके मंसूबों पर पानी फेरा जा सके।


बाइकर्स गैंग, हुड़दंगियों और सोशल मीडिया पोस्ट पर पैनी नजर
पुलिस की दूसरी सबसे बड़ी नजर उन युवाओं पर होगी जो दबंगई और हुड़दंग के जरिए अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। शहर में रफ्तार का कहर बरपाने वाले बाइकर्स गैंग, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के बाहर छात्राओं से छेड़खानी करने वाले मजनुओं और मारपीट करने वालों की पहचान शुरू हो गई है। ऐसे बिगड़ैल युवकों का नाम अब सीधे थानों के बैड कैरेक्टर (बीसीआर) रजिस्टर में दर्ज होगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ, आपत्तिजनक या दबंगई दिखाने वाले एडिटेड वीडियो डालने वालों के अकाउंट्स पर भी साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की सीधी नजर रहेगी।
घटना होने का इंतजार न करें, तुरंत एक्शन लें अफसर
एसएसपी राकेश रंजन ने पुलिस अधिकारियों को दो टूक कहा कि अपराध रोकने का मतलब सिर्फ केस दर्ज करना या गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध को होने से पहले ही रोकना असली पुलिसिंग है। सभी थानेदारों को पाबंद किया गया है कि वे संदिग्धों के डेटा को लगातार अपडेट रखें और जमीनी स्तर पर सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई करें। लापरवाह अफसरों पर भी नजर रखी जाएगी।
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