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Ranchi : दफ्तर की फाइलों और बैठकों से निकलकर जब रांची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह खुद पुराना विधानसभा के मोड़ पर धूप में खड़े हो गए, तो कान पर मोबाइल सटाकर फर्राटा भर रहे चालकों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। हाथ में डंडा या चालान बुक थामने के बजाय जब जिले का सबसे बड़ा ट्रैफिक अफसर सीधे आंखों में आंखें डालकर पूछने लगा कि “क्या ये कॉल आपकी जिंदगी से ज्यादा जरूरी है?”, तो बहानेबाजी में माहिर चालकों के पास भी सिर झुकाने के अलावा कोई जवाब नहीं बचा। एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर बुधवार को शहरभर में सड़क सुरक्षा जागरूकता के तीसरे दिन माहौल पूरी तरह बदला हुआ था। “ड्राइविंग के दौरान मोबाइल नहीं” के नारे के साथ उतरी पुलिस ने चालान काटने के बजाय लोगों की सोच पर चोट करने की रणनीति अपनाई थी।
शहर के 11 चौराहों पर नाकेबंदी, बहाने बनाने वालों को आई शर्म
सुबह से ही पुलिस की टीमें शहर के मुख्य रास्तों पर मुस्तैद थीं। किशोरी यादव चौक, काठीटांड़, पिस्का मोड़, राजेंद्र चौक, पटेल चौक, कर्बला चौक और बहु बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में एक साथ यह मुहिम शुरू हुई। रिंग रोड की ओर जाने वाली तेज रफ्तार गाड़ियों को भी रोका गया। आमतौर पर पुलिस को देखकर जेब से रसूख या सिफारिश निकालने वाले लोग उस वक्त असहज हो गए, जब अफसरों ने उन्हें रोककर पहले पानी पूछा और फिर बड़े ही शांत लहजे में सड़क हादसों के आंकड़े सामने रख दिए। कई बाइक सवार जो एक हाथ से हैंडल संभालते हुए दूसरे हाथ से फोन पर चैट निपटा रहे थे, उन्हें सड़क किनारे खड़ा करके यह समझाया गया कि उनकी इस एक सेकंड की लापरवाही से घर पर इंतजार कर रहे परिवार का क्या हाल हो सकता है।

डॉन बॉस्को और जीजीपीएस के बाहर अभिभावकों को दी नसीहत
दोपहर में जब स्कूलों की छुट्टी का वक्त हुआ, तो पुलिस की टीम डॉन बॉस्को और जीजीपीएस स्कूल के गेट पर पहुंची। यहां का नजारा और भी चौंकाने वाला था। कई माता-पिता अपने बच्चों को आगे-पीछे बैठाकर कान में ईयरफोन लगाए या सीधे फोन पर बतियाते हुए गाड़ी चला रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने ऐसे अभिभावकों को अलग बुलाकर समझाया कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने बड़ों को करते देखते हैं। अगर माता-पिता ही हेलमेट और सीट बेल्ट को बोझ समझेंगे, तो बच्चे कभी सुरक्षित ड्राइविंग की आदत नहीं अपना पाएंगे। इसके साथ ही स्कूली बच्चों को बिना लाइसेंस बाइक या स्कूटी थमाने वाले परिजनों को भी कड़ी चेतावनी दी गई। ऑटो और टोटो चालकों को भी रोका गया, जो सीट से ज्यादा सवारियां भरकर फोन पर व्यस्त थे।

1150 लोगों से सीधा संवाद, पुलिस ने मांगी सुरक्षित शहर के लिए साझेदारी
दिनभर चले इस अभियान के दौरान पुलिस ने करीब 1150 वाहन चालकों, राहगीरों और विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। ट्रक ड्राइवरों से लेकर दफ्तर भाग रहे युवाओं तक को ट्रैफिक सिग्नल का सम्मान करने, गति सीमा में रहने और पीछे बैठने वाली सवारी के लिए भी हेलमेट व सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने की बात कही गई। रांची ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि सिर्फ जुर्माना लगाकर हादसों को नहीं रोका जा सकता। जब तक लोग खुद यह नहीं समझेंगे कि घर सुरक्षित लौटना ही उनकी सबसे बड़ी मंजिल है, तब तक शहर की सड़कें महफूज नहीं हो सकतीं। पुलिस ने अपील की है कि लोग खुद सुधरें और दूसरों को भी इसके लिए टोकें, तभी रांची की सड़कों पर व्यवस्था बन पाएगी।
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