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Ranchi : रांची की सुबह रोज की तरह थी। सड़क पर स्कूल जाते बच्चे, दफ्तर पहुंचने की जल्दी में लोग और बाजार की ओर बढ़ते वाहन। लेकिन इन सबके बीच एक सच्चाई छिपी है, जो हर दिन किसी न किसी घर का सुकून छीन लेती है… सड़क दुर्घटनाएं। इसी सच्चाई से लोगों को रूबरू कराने के मकसद से रांची में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 की शुरुआत हुई।
जागरूकता रथ नहीं, जिम्मेदारी का संदेश
समाहरणालय परिसर में जब जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाई गई, तो यह सिर्फ एक वाहन को रवाना करना नहीं था। यह उन परिवारों की याद थी, जिन्होंने सड़क पर अपनों को खोया है। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि छोटी सी लापरवाही भी जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सीख से सुरक्षा का मतलब है नियमों को समझना और उन्हें अपनाना।

गांव से शहर तक पहुंचेगी सुरक्षा की बात
जागरूकता रथ अब शहर की सड़कों से लेकर गांव की गलियों तक पहुंचेगा। स्कूलों, कॉलेजों और बाजारों में एलईडी वैन के जरिए लोगों को बताया जाएगा कि हेलमेट चालान से बचने का नहीं, सुरक्षित घर लौटने का साधन है। सीट बेल्ट सिर्फ नियम नहीं, परिवार के प्रति जिम्मेदारी है।
आंकड़ों में छिपा दर्द
आंकड़े बताते हैं कि सड़क हादसे कितने गंभीर हैं। वर्ष 2024 में रांची जिले में 746 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 550 लोगों की मौत हुई। कई घरों की खुशियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं। वर्ष 2025 में नवंबर तक 747 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं और 504 लोगों की जान चली गई। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, टूटे सपने हैं।
सख्ती के साथ जागरूकता की जरूरत : एसपी
ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह का कहना है कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन बदलाव सिर्फ चालान से नहीं आएगा। बदलाव तब आएगा जब लोग खुद नियमों को अपनी सुरक्षा समझेंगे।

बच्चों से बड़ों तक सीख की पहल
पूरे महीने सड़क सुरक्षा चौपाल, स्कूल और कॉलेजों में सावधानी की पाठशाला, प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक और खेलकूद प्रतियोगिताएं होंगी। बच्चों को शुरू से ही ट्रैफिक नियम सिखाने पर जोर दिया जाएगा ताकि भविष्य सुरक्षित हो।
हर नियम एक जिंदगी बचा सकता है
किसी मां का बेटा, किसी बच्चे का पिता और किसी परिवार का सहारा यूं ही सड़क पर नहीं जाना चाहिए। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का यह अभियान यही संदेश देता है कि अगर हर व्यक्ति एक नियम का पालन करे, तो सड़कों पर मौत नहीं, जिंदगी चलेगी।
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