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Ranchi : संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। यात्रियों की भीड़ थी, लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने की तैयारी में थे। इसी बीच बी-3 कोच में बैठे तीन युवकों पर RPF की नजर ठहर गई। देखने में सब कुछ नॉर्मल लग रहा था, लेकिन उनके पास रखे कई बैग और उनकी घबराहट ने अधिकारियों को शक में डाल दिया। कुछ देर बाद जो खुलासा हुआ, उसने सभी को चौंका दिया। बैगों के अंदर कपड़े या घरेलू सामान नहीं, बल्कि 61 किलोग्राम गांजा भरा हुआ था। इसकी कीमत करीब 30.50 लाख रुपये बताई जा रही है। RPF ने तीनों युवकों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया है। गिरफ्तार युवकों की पहचान बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले आयुष सिंह (22), प्रिंस कुमार (21) और अंकित पाठक (19) के रूप में हुई है। इनके पास से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
एक नजर और बढ़ गया शक
30 मई को रांची रेलवे स्टेशन पर RPF फ्लाइंग टीम, आरपीएफ पोस्ट और अपराध शाखा की संयुक्त टीम ऑपरेशन ‘NARCOS’ के तहत जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस के बी-3 कोच में तीन युवक चार ट्रॉली बैग और तीन पिट्ठू बैग के साथ बैठे मिले। अधिकारियों को उनकी गतिविधियां कुछ अलग लगीं। पूछताछ शुरू हुई तो तीनों के चेहरे का रंग बदलने लगा। सवालों के जवाब भी उलझे हुए थे। यहीं से अधिकारियों का शक और गहरा गया।
सवाल बढ़े तो टूट गई चुप्पी
RPF अधिकारियों ने जब बैगों के बारे में पूछा तो पहले युवक गोलमोल जवाब देते रहे। लेकिन कड़ा रुख अपनाने के बाद उनकी चुप्पी टूट गई। आखिरकार उन्होंने कबूल कर लिया कि बैगों में गांजा रखा हुआ है। इसके बाद पूरी टीम सतर्क हो गई। ट्रेन को बीच रास्ते में रोकना संभव नहीं था, इसलिए आरोपियों को उनके सामान के साथ नामकुम रेलवे स्टेशन पर उतारा गया।
बैग खुले तो सामने आ गया नशे का जखीरा
नामकुम स्टेशन पर जब एक-एक बैग की तलाशी ली गई तो अंदर से पैकेटों का ढेर निकलने लगा। कुल 61 पैकेट बरामद हुए। जांच में इनका कुल वजन 61 किलोग्राम पाया गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत बरामद सामग्री की जांच कराई। डीडी किट से परीक्षण में पुष्टि हुई कि यह गांजा ही है। बरामद खेप की अनुमानित कीमत लगभग 30.50 लाख रुपये आंकी गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाया जाना था।
रेलवे बना तस्करों का रास्ता
जांच अधिकारियों का मानना है कि नशा तस्कर अक्सर लंबी दूरी की ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में सामान के बीच प्रतिबंधित पदार्थ छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। हालांकि इस बार आरपीएफ की सतर्कता ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया।
ऑपरेशन NARCOS लगातार दे रहा सफलता
रेलवे सुरक्षा बल इन दिनों ऑपरेशन ‘NARCOS’ के तहत नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चला रहा है। इसी अभियान के तहत स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में लगातार जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी ताकि रेलवे मार्ग का इस्तेमाल कर नशे की तस्करी करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके।
टीम की सतर्कता से मिली सफलता
पूरी कार्रवाई सहायक सुरक्षा आयुक्त प्रताप सिंह नेगी के निर्देशन में की गई। अभियान में इंस्पेक्टर शिशुपाल कुमार, इंस्पेक्टर लालबहादुर, एएसआई योगेंद्र कुमार, एएसआई अनिल कुमार, एएसआई अभिषेक कुमार, ए.जे. अंसारी, आर.के. सिंह, हेमंत और छोटे कुमार सिंह की अहम भूमिका रही। फिलहाल तीनों आरोपियों को जीआरपी रांची के हवाले कर दिया गया है। पुलिस अब इस बात की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है कि इस तस्करी के पीछे कौन लोग हैं और नशे की यह खेप आखिर किस बाजार तक पहुंचने वाली थी।
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