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Hazaribagh (Shiv Narayan Sahu) : झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड का बाबूपारा गांव आम दिनों में शांत रहता है। लोग सुबह खेतों की ओर निकल जाते हैं, दोपहर में चौपाल पर गपशप होती है और शाम होते ही गांव अपने ढर्रे पर लौट आता है। लेकिन इस बार सुबह कुछ अलग थी। एक घर का दरवाजा देर तक नहीं खुला, आंगन सूना पड़ा था और भीतर पसरा सन्नाटा डर पैदा कर रहा था। जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देख हर कोई सन्न रह गया। फर्श पर वकील राम और उनकी पत्नी झुनिया देवी की लाशें पड़ी थीं। पहली नजर में ही गला रेतकर हत्या की आशंका जताई जाने लगी। देखते ही देखते पूरे गांव में खबर आग की तरह फैल गई।
एक सीधी-सादी जिंदगी, अचानक खामोश
वकील राम और झुनिया देवी बुजुर्ग दंपती थे। उनका बेटा रामविलास दास पेशे से शिक्षक है और शहर में रहकर नौकरी करता है। गांव में माता-पिता अकेले रहते थे। पड़ोसी बताते हैं कि दोनों शांत स्वभाव के थे, किसी से दुश्मनी की बात कभी सामने नहीं आई। यही वजह है कि सवाल और गहरे हो गए हैं। आखिर कौन था जो रात के अंधेरे में घर के भीतर पहुंच गया? क्या दरवाजा खुद खोला गया था? क्या हत्यारा कोई जानने वाला था?
संघर्ष के निशान कम, साजिश की बू ज्यादा
घर के भीतर ज्यादा तोड़फोड़ या संघर्ष के निशान नहीं मिले। यही बात इस वारदात को और रहस्यमय बना रही है। अगर जबरन घुसपैठ होती तो शोर-शराबा होता, सामान बिखरा मिलता। लेकिन यहां सब कुछ लगभग सामान्य दिख रहा था, बस दो जिंदगियां खत्म हो चुकी थीं। गांव में चर्चा है कि यह काम किसी ऐसे व्यक्ति का हो सकता है जिसे घर और दिनचर्या की पूरी जानकारी थी। हालांकि यह सब अभी सिर्फ कयास हैं। सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
पुलिस की एंट्री, गांव घिरा सन्नाटे में
घटना की सूचना मिलते ही बड़कागांव थाना की टीम मौके पर पहुंची। घर को चारों तरफ से घेर लिया गया। आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू हुई। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ताकि मौत की असली वजह साफ हो सके। थानेदार कृष्णा गुप्ता ने कहा कि हर एंगल से जांच की जा रही है। जल्दबाजी में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा। पुलिस तकनीकी साक्ष्य भी जुटा रही है।
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