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New Delhi : आमतौर पर भारत निर्वाचन आयोग का नाम आते ही दिमाग में चुनाव, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों की तस्वीर उभरती है। लेकिन सोमवार की सुबह नजारा थोड़ा अलग था। दिल्ली के कॉमनवेल्थ गेम्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में ट्रैक पर दौड़ते कदम, बैडमिंटन कोर्ट पर गूंजती शटल की आवाज और साथियों की तालियों के बीच लोकतंत्र का एक और चेहरा दिखा। मौका था भारत निर्वाचन आयोग के वार्षिक खेल सप्ताह 2026 के शुभारंभ का।
“मैदान की ईमानदारी ही लोकतंत्र की असली ताकत”
सुबह की हल्की ठंड में जब प्रतिभागी वार्मअप कर रहे थे, तभी CEC यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहुंचे। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम की शुरुआत की और अपने संबोधन में खेल और चुनाव के बीच एक सीधा रिश्ता जोड़ा। उन्होंने कहा कि खेल हमें सिखाता है निष्पक्ष रहना, नियमों का सम्मान करना और जीत से ज्यादा प्रक्रिया की पवित्रता को महत्व देना। यही बात चुनावों पर भी लागू होती है। बात छोटी थी, लेकिन असर गहरा।

“रन फॉर डेमोक्रेसी”… सिर्फ दौड़ नहीं, एक प्रतीक
कार्यक्रम की असली गर्माहट तब दिखी जब “रन फॉर डेमोक्रेसी” के तहत महिलाओं की 100 मीटर दौड़ शुरू हुई। ट्रैक पर दौड़ती प्रतिभागियों के चेहरों पर तनाव से ज्यादा उत्साह था। कई प्रतिभागी रोज दफ्तर में फाइलों और डेटा के बीच काम करती हैं, लेकिन आज वे स्पाइक्स पहनकर ट्रैक पर थीं। 72 महिला प्रतिभागियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को खास बना दिया। यह सिर्फ खेल नहीं था, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक था कि संस्थान के भीतर भी बराबरी और भागीदारी को महत्व दिया जा रहा है।
383 कदम, एक टीम
कुल 383 प्रतिभागी इस खेल सप्ताह में हिस्सा ले रहे हैं। शतरंज से लेकर क्रिकेट, कैरम से लेकर फुटबॉल और एथलेटिक्स तक, सात खेलों की 43 श्रेणियों में मुकाबले होंगे। अलग-अलग आयु वर्ग के लिए 100, 200, 400 और 800 मीटर की दौड़ रखी गई है। यहां कोई राजनीतिक बहस नहीं, कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं। यहां सहकर्मी एक-दूसरे को नाम से पुकारते हैं, हौसला बढ़ाते हैं और हारने वाले को भी उतनी ही तालियां मिलती हैं जितनी जीतने वाले को।

काम से बाहर की एक पहचान
चुनाव आयोग का काम बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। चुनावी मौसम में दबाव और बढ़ जाता है। ऐसे में यह खेल सप्ताह कर्मचारियों के लिए राहत की सांस जैसा है। एक अधिकारी ने मुस्कुराते हुए कहा, “यहां हम पद से नहीं, खेल से पहचाने जाते हैं।” यही इस आयोजन की असली खूबसूरती है।
मैदान पर सद्भाव, लोकतंत्र में शक्ति
इस साल का थीम है, “मैदान पर सद्भाव, लोकतंत्र में शक्ति।” यह सिर्फ नारा नहीं, बल्कि एक सोच है। मैदान पर जब खिलाड़ी नियमों का पालन करते हैं, एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और परिणाम को स्वीकार करते हैं, तो वही भावना लोकतंत्र को मजबूत करती है। खेल सप्ताह 2026 की यह शुरुआत याद दिलाती है कि लोकतंत्र सिर्फ मतपेटियों तक सीमित नहीं है। वह उन मूल्यों में भी बसता है, जो हमें साथ दौड़ना, साथ खेलना और साथ जीतना सिखाते हैं।

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