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Pakur (Jaydev Kumar) : मांदर की थाप गूंज रही थी। रंग बिरंगे परिधान में लोग थिरक रहे थे और चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। यह नजारा किसी गांव के अखाड़े का नहीं, बल्कि पाकुड़ पुलिस केंद्र का था। मौका था आदिवासी समाज के प्रमुख पर्व सोहराय का, जहां वर्दी की सख्ती कुछ देर के लिए पीछे छूट गई और इंसानियत, परंपरा और अपनापन सामने आ गया।
पुलिस परिवार ने मिलकर मनाया त्योहार
पाकुड़ पुलिस केंद्र में आयोजित सोहराय महापर्व मिलन समारोह में पुलिस पदाधिकारी, जवान और उनके परिवार एक साथ नजर आए। पुलिस सोहराय समिति के इस आयोजन ने यह दिखा दिया कि त्योहार सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने का जरिया होते हैं। बच्चे, महिलाएं और जवान सभी एक ही रंग में रंगे दिखे।
पारंपरिक पूजा से हुई शुरुआत
समारोह की शुरुआत मांझी थान में पारंपरिक पूजा अर्चना से हुई। नायकी और गुडित ने विधि विधान से पूजा कराई। ढोल मांदर की आवाज के बीच जब पूजा संपन्न हुई, तो माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया।
मांदर की थाप पर थिरकी एसपी निधि
इस आयोजन की सबसे खास तस्वीर तब बनी जब निधि द्विवेदी खुद मांदर की थाप पर जवानों के साथ थिरकती नजर आईं। उनके साथ डीएसपी, पुलिस पदाधिकारी और जवान भी थिरकते रहे। यह दृश्य सिर्फ नृत्य का नहीं था, बल्कि भरोसे और अपनापन का प्रतीक बन गया।
संस्कृति से जुड़ने का संदेश
एसपी निधि द्विवेदी ने कहा कि सोहराय पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। उन्होंने खासकर आदिवासी समाज से अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक परंपराएं जीवित हैं, तब तक समाज मजबूत रहता है।
मांदर की थाप पर खूब थिरकी SP निधि, पाकुड़ में यादगार बन गया सोहराय… देखें वीडियो pic.twitter.com/3cUw2MjSd0
— News Samvad (@newssamvaad) January 7, 2026
प्रकृति से सीखने का अवसर
डीएसपी ने अपने संबोधन में कहा कि सोहराय सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है। आदिवासी समाज पेड़ पौधों और जीव जंतुओं की पूजा करता है, उनकी रक्षा करता है। यही कारण है कि आज भी जंगल और पर्यावरण सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि इस सोच को हर वर्ग को अपनाना चाहिए।
यादगार बन गया सोहराय का यह पल
शाम ढलते ढलते पुलिस केंद्र में थकान नहीं, बल्कि संतोष दिख रहा था। जवानों के लिए यह पल ड्यूटी से अलग, अपनेपन से जुड़ने का अवसर था। यह सोहराय सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि पुलिस और समाज के बीच भरोसे की एक मजबूत डोर बनकर उभरा।
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