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Ranchi : धनबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शराब की बिक्री करने वाली एजेंसी के स्टॉक की जांच के दौरान कई गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। बलियापुर और प्रधानखंता की दुकानों में शराब की बोतलों के ढक्कनों में छेद पाए गए। कई बोतलें पूरी तरह खाली थीं, जबकि कुछ में आधी शराब ही बची थी। जब इस पर सवाल उठे तो एजेंसी की ओर से सफाई दी गई कि दारूबाज चूहों ने बोतलों के ढक्कन कुतर दिए और शराब पी गए। यह दलील सुनकर विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद भड़क गए। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसकी गहराई से जांच की जाएगी।
मीडिया से बातचीत के दरम्यान मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने तंज भरे लहजे में कहा, “ये देखना है कि ये चूहे दो पांव वाले हैं या ज़मीन पर रेंगने वाले। दारूबाज चूहों की शिनाख्त पहचान ज़रूर होगी और कार्रवाई भी।” उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार पार्ट टू जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
उधर, उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त रामलीला रवानी ने भी एजेंसी की बात को खारिज करते हुए कहा कि विभाग ने एजेंसी को फ्रेश स्टॉक दिया था। ऐसे में शराब की बर्बादी की भरपाई एजेंसी को करनी होगी। विभाग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा और नुकसान की रकम वसूली जाएगी। उन्होंने साफ कहा, “चूहों ने बोतल काटी या नहीं, इससे विभाग को कोई मतलब नहीं है।”
यहां याद दिला दें कि झारखंड में एक सितंबर से नई शराब नीति लागू होने जा रही है। इसी सिलसिले में पुराने स्टॉक का मिलान कर नए संचालकों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। यह कोई पहला मामला नहीं है। अप्रैल 2024 में भी धनबाद के राजगंज थाना में जब्त की गई 10 किलो भांग और 9 किलो गांजा के गायब होने के पीछे भी चूहों को जिम्मेदार ठहराया गया था। उस समय पुलिस ने अदालत को रिपोर्ट दी थी कि चूहों ने नशे का सारा सामान नष्ट कर दिया। अब एक बार फिर “दारूबाज चूहे” चर्चा में हैं। पर इस बार सरकार इनकी सही पहचान कर सख्त कदम उठाने के मूड में है।
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