अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : सुबह का समय था। सभागार में बैठे छात्र-छात्राओं की आंखों में उत्सुकता थी और चेहरे पर कुछ नया सीखने की चाह। मंच पर दीप जलते ही माहौल बदल गया। यह कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन सपनों को बचाने की कोशिश थी, जो नशे की गिरफ्त में आकर अक्सर टूट जाते हैं। मौका था नालसा की डॉन-2025 योजना के समापन का, जहां कानून, कला और संवेदना एक साथ खड़ी नजर आई।
एक सप्ताह, हजारों कहानियां
पिछले सात दिनों में रांची से लेकर दूर-दराज के इलाकों तक युवाओं के बीच एक ही सवाल गूंजता रहा, क्या नशा वाकई भविष्य बना सकता है। जवाब खुद युवाओं ने दिया। कहीं नुक्कड़ नाटक हुए, कहीं संवाद, तो कहीं शपथ समारोह। इस अभियान से जुड़े हजारों युवा सिर्फ श्रोता नहीं बने, बल्कि उन्होंने अपनी बात भी रखी। किसी ने दोस्त को खोने का दर्द साझा किया, तो किसी ने अपने परिवार को टूटते देखा था।

स्वामी विवेकानंद की राह पर चलने का संदेश
समापन समारोह में न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने युवाओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा देश की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन नशा इस ताकत को कमजोर कर देता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि अनुशासन और चरित्र ही वह रास्ता है, जो युवाओं को सही दिशा दिखा सकता है। उनकी बातें सुनकर कई छात्र गंभीर हो गए, मानो किसी ने उनके भीतर सोई जिम्मेदारी जगा दी हो।

जब रंगों ने बयां की पीड़ा
कार्यक्रम में लगी पेंटिंग प्रदर्शनी सिर्फ कला नहीं थी, बल्कि बच्चों के मन की आवाज थी। किसी चित्र में टूटी हुई जंजीर थी, तो किसी में उज्ज्वल भविष्य की किरण। कस्तुरबा गांधी बालिका स्कूल की छात्राओं ने बताया कि उन्होंने ये चित्र अपने आसपास देखी सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर बनाए हैं। कई अभिभावकों की आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने इन रंगों के पीछे छुपा दर्द और उम्मीद देखी।
सम्मान ने बढ़ाया आत्मविश्वास
पेंटिंग और निबंध प्रतियोगिता में सफल छात्राओं को जब मंच पर बुलाया गया, तो उनके चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था। प्रमाण पत्र और शील्ड उनके लिए सिर्फ पुरस्कार नहीं थे, बल्कि यह भरोसा था कि उनकी मेहनत और सोच की कद्र की जा रही है। कई छात्राओं ने कहा कि अब वे अपने दोस्तों को भी नशे से दूर रहने के लिए समझाएंगी।

आंकड़ों से आगे की सच्चाई
आंकड़े बताते हैं कि डॉन-2025 के तहत लाखों लोग जुड़े, लेकिन असली सफलता उन बदली हुई सोचों में छिपी है। डालसा सचिव राकेश रौशन के अनुसार, इस अभियान ने युवाओं को सिर्फ कानून की जानकारी नहीं दी, बल्कि उन्हें अपने फैसलों की जिम्मेदारी भी समझाई।
उम्मीद का दिया जलाकर विदाई
जब कार्यक्रम खत्म हुआ, तो सभागार से निकलते युवाओं के कदम पहले से ज्यादा मजबूत लग रहे थे। उनके हाथों में प्रमाण पत्र थे और दिल में एक संकल्प। शायद यही डॉन-2025 की सबसे बड़ी जीत थी, युवाओं को यह एहसास दिलाना कि नशा नहीं, बल्कि सही सोच ही उनके उज्ज्वल भविष्य की असली कुंजी है।
इसे भी पढ़ें : DLSA बना ‘ऑक्सीजन’, दम तोड़ते 51 रिश्तों में फूंक डाला नयी जान



