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Ranchi (Ormanjhi) : ओरमांझी के सिलदरी गांव के शंकर घाट मोहल्ले में एक छोटा सा घर है। मिट्टी की दीवारें, टीन की छत और बाहर बंधी एक पुरानी साइकिल। इसी घर से 22 नवंबर 2025 को 12 साल का कन्हैया कुमार खलने निकला था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह निकलना पूरे परिवार की जिंदगी बदल देगा। आज करीब दो महीने बीत चुके हैं। कन्हैया अब तक वापस नहीं लौटा।
सूना आंगन, बुझी रसोई और हर वक्त छलकती आंखें
कन्हैया की मां शांति देवी दरवाजे के पास बैठी सिसकती रहती हैं। आखों से लोर झर-झर बहते रहते हैं। जरा सी आहट होती है तो उठकर बाहर झांक लेती हैं। उन्हें अब भी लगता है कि शायद बेटा लौट आया हो। कहते-कहते उनकी आवाज भर्रा जाती है… “वो रोज स्कूल से आकर सबसे पहले पानी मांगता था… अब घड़ा भरा रहता है, पर पूछने वाला कोई नहीं।” घर की रसोई में चूल्हा जलता तो है, पर पहले जैसा स्वाद नहीं रहा। मां कहती हैं कि बेटे के बिना निवाला गले से उतरता ही नहीं।
पिता का दर्द, जो आंखों से ज्यादा चेहरे पर दिखता है
कन्हैया के पिता दिन में फुचका बेचते हैं। कमाई बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन उसी से घर चलता है। बेटे के लापता होने के बाद उन्होंने दुकान कई दिनों तक बंद रखी। फिर बेटे की एक पुरानी फोटो जेब में डालकर निकल पड़े। नामकुम, टाटासिल्वे, रजरप्पा, रामगढ़, हजारीबाग, देवघर… जहां भी किसी ने कहा कि वहां ऐसा बच्चा देखा गया है, वे पहुंच गए। वे धीमी आवाज में कहते हैं… “कभी लगता है वो किसी बस स्टैंड पर होगा, कभी मंदिर में। बस जिंदा मिल जाए, यही दुआ है।”

18 दिन तक थाने के चक्कर
शांति देवी कलपते हुए बताती हैं कि बेटे के गायब होने के बाद वह रोज थाने गईं। वह कहती हैं… “कभी कहा गया कल आना, कभी कहा गया साहब नहीं हैं। 18 दिन बाद जाकर एफआईआर लिखी गई।” पुलिस ने सीसीटीवी देखने और जांच की बात कही, लेकिन परिवार को अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
मां की आखिरी उम्मीद
शांति देवी को याद है कि हाल ही में पुलिस ने दो बच्चों अंश और अंशिका को ढूंढ निकाला था। उसी उम्मीद को सीने से लगाए वह रोज भगवान से प्रार्थना करती हैं। “मेरा बेटा कहीं भी हो, बस सही सलामत मिल जाए। मैं कुछ नहीं मांगती, बस मेरा बच्चा लौटा दो।”
गांव भी परेशान, सवालों में घिरा प्रशासन
गांव के लोग भी रोज पूछते हैं, “कुछ पता चला?” लेकिन जवाब हर दिन वही होता है, “नहीं।” लोगों का कहना है कि बच्चों के लापता होने के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई धीमी है।
नेताओं और संगठनों का सहारा
अब कुछ सामाजिक संगठन परिवार के साथ खड़े हुए हैं। पुलिस अधिकारियों ने भी तलाश जारी रखने का भरोसा दिया है। बताया गया है कि 17 जनवरी को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू भी परिवार से मिलने आएंगे।
इंतजार जो खत्म नहीं होता
शाम ढलते ही शांति देवी फिर दरवाजे पर बैठ जाती हैं। रात में भी आखें तो बंद होती हैं, पर सुकून की नींद नहीं आती। कहीं से किसी बच्चे की आवाज आए तो दिल धड़क उठता है। घर की दीवार पर टंगी कन्हैया की स्कूल वाली फोटो अब पूरे परिवार की ताकत भी है और सबसे बड़ा दर्द भी। यह सिर्फ एक बच्चे की गुमशुदगी का मामला नहीं है। यह एक मां की टूटती उम्मीद, एक पिता की थकती तलाश और एक परिवार के रोज-रोज तिल-तिल मरने की कहानी है।
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