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Home » जब बेटियों ने तोड़ी चुप्पी, तब खुली सेहत की राह
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जब बेटियों ने तोड़ी चुप्पी, तब खुली सेहत की राह

June 4, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : गांवों में आज भी माहवारी यानी पीरियड्स ऐसा विषय है, जिस पर खुलकर बात करने से कई लोग हिचकते हैं। कई किशोरियां सही जानकारी के अभाव में परेशानियों का सामना करती हैं। यही वजह है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत चलाया गया ‘चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो’ अभियान सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सोच बदलने की एक पहल बनकर सामने आया। 29 मई से 4 जून तक चले इस अभियान का समापन रातू प्रखंड के मुरचू गांव में हुआ। इस दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में महिलाओं और किशोरियों के बीच माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया गया। अभियान का मकसद था कि माहवारी को लेकर समाज में फैली झिझक और गलत धारणाओं को खत्म किया जाए और महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जाए।

जिस विषय पर लोग चुप रहते थे, उस पर खुलकर हुई चर्चा

कार्यक्रम में मौजूद किशोरियों और महिलाओं ने माहवारी से जुड़े कई सवाल पूछे। कई महिलाओं ने बताया कि पहले इस विषय पर घरों में बात तक नहीं होती थी। अगर किसी लड़की को कोई परेशानी होती थी तो वह भी चुपचाप सह लेती थी। यूनिसेफ के वॉश विशेषज्ञ कुमार प्रेमचंद और राज्य समन्वयक श्रेया अग्रवाल ने बेहद आसान भाषा में महिलाओं को समझाया कि माहवारी कोई बीमारी नहीं है। यह महिलाओं के शरीर की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान शरीर की साफ-सफाई का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना किसी अन्य बीमारी से बचाव के लिए होता है।

सिर्फ पैड इस्तेमाल करना ही काफी नहीं

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि केवल सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह भी है कि उसका सुरक्षित तरीके से निपटान किया जाए। विशेषज्ञों ने कहा कि इस्तेमाल किए गए पैड या कपड़ों को खुले में फेंकने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए ऐसे अपशिष्टों को गड्ढा खोदकर सुरक्षित तरीके से नष्ट करना चाहिए। महिलाओं को यह भी बताया गया कि माहवारी के दौरान पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होता है।

राज्य को माहवारी अनुकूल बनाने की कोशिश

इस बार अभियान का फोकस सिर्फ जागरूकता तक सीमित नहीं रहा। सरकार और स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य है कि माहवारी से जुड़ी सेवाओं और सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए। अधिकारियों ने बताया कि कोशिश यह है कि हर किशोरी और महिला को सही जानकारी, जरूरी संसाधन और बेहतर सुविधाएं मिलें ताकि माहवारी के कारण किसी को पढ़ाई, काम या सामाजिक गतिविधियों से दूर न होना पड़े।

रंजीता हेम्ब्रम ने दिलाई शपथ

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की निदेशक रंजीता हेम्ब्रम ने की। उन्होंने कहा कि माहवारी को लेकर फैली चुप्पी को तोड़ना बहुत जरूरी है। जब तक महिलाएं इस विषय पर खुलकर बात नहीं करेंगी, तब तक कई समस्याएं बनी रहेंगी। उन्होंने सभी महिलाओं और किशोरियों को माहवारी स्वच्छता की शपथ दिलाई और कहा कि वे अपने घरों और गांवों में भी इस विषय पर जागरूकता फैलाएं।

माहवारी के साथ पर्यावरण का भी संदेश

कार्यक्रम का एक खास पहलू यह भी रहा कि विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पौधारोपण किया गया। महिलाओं और किशोरियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। अधिकारियों ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब तक हमारा परिवेश साफ नहीं होगा, तब तक बेहतर स्वास्थ्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

गांव की महिलाओं ने दिखाई उत्साहपूर्ण भागीदारी

कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, मुखिया, जल सहिया, किशोरी समूह की सदस्याएं और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं। कई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और कहा कि ऐसे कार्यक्रम गांवों में लगातार होने चाहिए ताकि नई पीढ़ी को सही जानकारी मिल सके।

इसे भी पढ़ें : जब महिलाओं ने संभाली कमान, राष्ट्रीय मंच पर चमका पाकुड़ का ये गांव

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